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दो दिवसीय उस्‍ताद रजब अली-अमानत अली खां स्‍मरण संगीत समारोह का हुआ समापन

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देवास। मध्‍यप्रदेश शासन, संस्‍कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन एवं नगर निगम, देवास के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय ‘’उस्‍ताद रजब अली-अमानत अली खां’’ स्‍मरण संगीत समारोह के दूसरे एवं अंतिम दिन 9 जनवरी को तीन संगीत सभाएं सजीं।

जिनमें सुश्री वर्षा बंसीवाल, इंदौर का गायन, संगीत गुरु भरत नायक, ग्‍वालियर का सितार वादन एवं आमिर खान, प्रियंक कृष्‍णा, फिल स्‍कार्फ एवं अभिजीत का सरोद, सेक्‍सोफोन, वायलिन एवं तबला वाद्यवृंद सम्मिलित थीं।

दूसरे दिवस की पहली संगीत सभा गायन के नाम रही। इंदौर की गुणी गायिका सुश्री वर्षा बंसीवाल ने अपनी साधवा और परम्‍परा का परिचय अपने सुमधुर गायन के साथ दिया। उन्‍होंने प्रस्‍तुति की प्रारंभ राग पूरिया धनाश्री से किया। कोमल सायंकालीन राग में उन्‍होंने पद्मभूषण कुमार गंधर्व की रचनाओं को प्रस्‍तुत किया। उनके साथ तबले पर विवेक सिरसागर और हारमोनियम पर दीपक खसरावल ने सधी हुई संगत दी।

अगली प्रस्तुति सितार वादन की रही, जिसे ग्वालियर के सुविख्यात संगीत गुरु भरत नायक ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने वादन के लिए राग चारूकेशी का चयन किया। प्रस्तुति का आरंभ विलंबित लय में तीनताल में निबद्ध रचना द्वारा हुआ, जिसमें राग का सधे हुए विस्तार और स्वरों की गंभीरता का सुंदर चित्रण हुआ। इसके पश्चात मध्य लय में तीनताल की रचना प्रस्तुत की गई और इसके बाद द्रुत लय में प्रभावशाली झाला ने श्रोताओं को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। अंत में उन्‍होंने एक पारम्‍परिक धुन के साथ अपने वादन का समापन किया। उनके साथ तबले पर गांधार राजहंस, इंदौर ने संगत दी।

दूसरे दिवस की सायंकालीन संध्या की अंतिम प्रस्तुति वाद्य संगीत के बहुरंगी सौंदर्य से सजी रही। मंच पर सरोद, सैक्सोफोन, वायलिन एवं तबले का सुसंयोजित वाद्यवृंद उपस्थित हुआ, जिसे आमिर खान, प्रियंक कृष्णा, फिल स्कार्फ तथा अभिजीत ने अपनी सधी हुई संगति से साकार किया। विविध वाद्यों का यह समन्वय संगीतप्रेमियों के लिए एक विरल और सुखद अनुभूति बन गया। प्रस्तुति के लिए मधुरता और भावप्रवणता से परिपूर्ण राग जोग का चयन किया गया। आलाप, जोड़ और झाला के क्रमबद्ध विस्तार के साथ राग का स्वरूप अत्यंत सौम्यता से उभरता गया।

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कर्णप्रिय स्वरों ने संपूर्ण वातावरण को संगीत के जादुई आलोक से भर दिया। इसके पश्चात विलंबित रचना रूपक ताल में, मध्यलय तीन ताल में तथा द्रुत तीन ताल में प्रभावशाली झाले की तिहाई के साथ प्रस्तुति का सुंदर और सशक्त समापन हुआ।

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