गिरते तापमान का फसलों पर असर, आलू-लहसुन की फसल के लिए किसानों को दिए जरूरी सुझाव

बेहरी। क्षेत्र में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर रबी की फसलों पर पड़ने लगा है। विशेष रूप से आलू और लहसुन की फसलें शीत प्रकोप के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।
ऐसे में किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग सक्रिय हो गया है और वैज्ञानिकों द्वारा आवश्यक सावधानियां और उपाय साझा किए जा रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, तापमान यदि 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है, तो आलू और लहसुन की फसलों में पाला लगने, पत्तियों के झुलसने और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। इस वर्ष क्षेत्र में किसानों ने बड़े पैमाने पर आलू और लहसुन की बोवनी की है, इसलिए मौसम की यह करवट किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
कृषि विभाग की सलाह: ऐसे बचाएं फसल-
बागली ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी काशीराम चौहान ने किसानों को शीत प्रकोप से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय बताए-
समय पर सिंचाई करें:
उन्होंने बताया कि यदि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहती है तो कम तापमान का प्रभाव फसल पर कम पड़ता है। सिंचाई शीत से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है, चाहे वह आलू-लहसुन हो या गेहूं-चना जैसी अन्य रबी फसलें।
मेढ़ों पर धुआं करें:
रात के समय खेतों की मेढ़ों पर धुआं करने से वातावरण का तापमान थोड़ा बढ़ता है, जिससे पाले का असर कम होता है।
रोगों से बचाव के लिए स्प्रे:
शीत ऋतु में फसलों में रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। ऐसे में आवश्यकतानुसार दवाइयों का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है, इससे फसल स्वस्थ बनी रहती है और तापमान का संतुलन भी बना रहता है।
मौसम अनुकूल, उत्पादन की उम्मीद-
किसानों का कहना है कि उनके खेतों में लगी आलू की फसल 40 दिन से अधिक की हो चुकी है और अब उसमें गांठें (फल) भी बैठने लगी हैं। यदि शीत प्रकोप से फसल सुरक्षित रही, तो इस बार बेहतर उत्पादन की पूरी संभावना है। कृषि विभाग भी मानता है कि कुल मिलाकर यह मौसम रबी फसलों के लिए अनुकूल है, बस सावधानी और समय पर उपाय जरूरी हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान बताए गए उपायों को अपनाएं और मौसम पर नजर बनाए रखें, तो ठंड का यह दौर फसलों के लिए नुकसानदेह साबित नहीं होगा।




