जन्माष्टमी: हर परिस्थिति में सकारात्मक रहना सिखाते हैं भगवान श्रीकृष्ण

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीखने योग्य बातें
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका व्यक्तित्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य-पालन और मानवीय गुणों की दृष्टि से भी अनुकरणीय है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और विवेक का परिचय दिया तथा समाज को सच्चे अर्थों में धर्म, प्रेम और कर्म का संदेश दिया।
धैर्य और साहस का महत्व-
श्रीकृष्ण ने बचपन से ही अनेक कठिनाइयों का सामना किया। जन्म से लेकर महाभारत के युद्ध तक वे परिस्थितियों से निरंतर जूझते रहे, लेकिन कभी धैर्य नहीं खोया। यह सिखाता है कि कठिन समय में घबराने के बजाय विवेकपूर्ण निर्णय लेकर साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कर्तव्य पालन और कर्मयोग-
गीता में श्रीकृष्ण ने “कर्म करने का अधिकार मनुष्य को है, फल की चिंता मत करो” का संदेश दिया। उन्होंने स्वयं भी जीवन में हर भूमिका को जिम्मेदारी से निभाया, चाहे ग्वालबाल का मित्र हों, रक्षक हों, राजनयिक हों या सारथी। यह हमें सिखाता है कि जीवन में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण से करना चाहिए।
मित्रता और संबंधों का आदर्श-
श्रीकृष्ण ने मित्रता में भी आदर्श प्रस्तुत किया। सुदामा के साथ उनकी मित्रता इस बात का प्रमाण है कि सच्चे संबंध धन, पद या परिस्थितियों पर आधारित नहीं होते। उनका जीवन यह बताता है कि संबंधों में स्नेह, सम्मान और निष्ठा सबसे मूल्यवान हैं।
धर्म और न्याय की स्थापना-
कृष्ण ने सदैव धर्म और न्याय की रक्षा के लिए कार्य किया। उन्होंने अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होकर समाज को यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की विजय निश्चित है। यह हमें प्रेरित करता है कि अन्याय का विरोध करना और सत्य का साथ देना मनुष्य का कर्तव्य है।
जीवन में आनंद और सकारात्मकता-
कृष्ण का जीवन आनंद, संगीत और प्रेम से भरा रहा। वे कठिन परिस्थितियों में भी बांसुरी की मधुर धुन से वातावरण को सुखद बना देते थे। यह सिखाता है कि जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो, हृदय में सकारात्मकता और प्रसन्नता बनाए रखना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणादायी है। उनका धैर्य, कर्मयोग, मित्रता, धर्मनिष्ठा और आनंदमय दृष्टिकोण हर व्यक्ति के जीवन में अपनाए जा सकते हैं। यदि हम उनके बताए आदर्शों को अपने आचरण में उतार लें, तो जीवन निश्चित रूप से सार्थक, संतुलित और सफल बन सकता है।




