भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा

– चल रही है गर्म हवा, गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ढूंढते हैं छांव, शीतल पेय की दुकानों पर भीड़
देवास। गर्मी ने देवास शहर में अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। लू से बचाव के लिए लोग दोपहर में बाहर कम ही निकल रहे हैं। दोपहर में शहर की सड़कों पर सन्नाटा सा छा रहा है। तेज गर्मी और लू के चलते लोग घरों में ही रहने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग बाहर निकलते हैं, वे छांव की तलाश में पेड़ों के नीचे खड़े नजर आते हैं।
शनिवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे गर्मी और लू के असर में और बढ़ोतरी हो सकती है।
गर्मी की वजह से स्वास्थ्य पर असर:
गर्मी और लू के प्रभाव से लोग सेहत संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, थकावट और चक्कर आना जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान लोगों को घर से बाहर कम ही निकलना चाहिए, खासकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक। इसके अलावा, ताजे फल और पानी की भरपूर मात्रा लेना जरूरी है।
गर्मी से बचने के उपाय:
🔷 पानी और ताजे तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
🔷 हल्के कपड़े पहनें और धूप में बाहर निकलते वक्त सिर को ढकने के लिए टोपी या छाता इस्तेमाल करें।
🔷 बच्चों और बुजुर्गों को धूप से बचाएं।
🔷 अगर बाहर जाना जरूरी हो तो ढीले और सूती कपड़े पहनें और पर्याप्त पानी पीकर ही बाहर निकलें।
नींबू पानी और गन्ने के रस की ठेलागाड़ियों पर बढ़ी भीड़:
गर्मी के इस सीजन में, नींबू पानी और गन्ने के रस की ठेलागाड़ियों पर भीड़ बढ़ गई है। शहर में कुछ-कुछ दूरी पर ये ठेलागाड़ियां लोगों को राहत देने का काम कर रही हैं। खासकर गन्ने के रस की ठेलागाड़ी पर लोग भारी संख्या में इकट्ठा हो रहे हैं, क्योंकि यह न सिर्फ ठंडक देता है बल्कि शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है। नींबू पानी का सेवन करने से शरीर में हाइड्रेशन बना रहता है और यह लू से बचाव में मदद करता है। शहर के मुख्य बाजारों और गली-मोहल्लों में इन ठेलागाड़ियों पर भीड़ लगना आम दृश्य बन गया है।
सेवा कार्य भी कर रहे शहरवासी:
गर्मी से बचाव के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्याऊ लगाई गई है। इन प्याऊ के माध्यम से गर्मी से बेहाल लोग ठंडा पानी पीकर राहत पा रहे हैं। गर्मी से बेजुबान जानवर व पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं।
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इसके साथ ही, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय नागरिक भी इस संकट में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं। वे अपने घरों की छतों और बालकनियों में पक्षियों के लिए पानी और दाना रख रहे हैं। इस प्रयास से पक्षी भी लू से बचकर राहत पा रहे हैं।




