खेत-खलियान

बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल प्रभावित

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– दाना बनने की अवस्था में तेज हवा से फसल आड़ी पड़ी, भाकिसं ने सर्वे व मुआवजे की उठाई मांग

देवास। जिले के ग्राम सुनवानी महाकाल सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम ने करवट ली है। बुधवार रात को गरज-चमक के साथ आंधी चली और करीब 20 मिनट तक तेज बारिश हुई। गुरुवार रात को व शुक्रवार को फिर से हुई बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी। तेज हवा और पानी के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल आड़ी हो गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इस समय अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की फसल दाना बनने की अवस्था में है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, जब फसल इस अवस्था में आड़ी हो जाती है तो पौधों की सीधी वृद्धि रुक जाती है और दाने का विकास प्रभावित होता है। कई किसानों का कहना है कि फसल लगभग तैयार होने की स्थिति में थी, लेकिन आंधी और बारिश ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। जिन खेतों में फसल पूरी तरह गिर चुकी है, वहां उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है।

नुकसान का दावा-
कई किसानों ने दावा किया है कि जिन खेतों में फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई है, वहां अधिक नुकसान हुआ है। यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ नहीं हुआ तो दानों में नमी बढ़ने और गुणवत्ता घटने की भी आशंका है, जिससे बाजार में उचित मूल्य मिलना कठिन हो सकता है।

कटाई में भी आएगी परेशानी-
जिन किसानों की फसल पककर तैयार थी, उनके लिए स्थिति और भी कठिन हो गई है। आड़ी पड़ी फसल की कटाई में अधिक श्रम और समय लगता है, जिससे लागत बढ़ जाती है। हार्वेस्टर मशीनों से कटाई में भी दिक्कत आती है, परिणामस्वरूप मजदूरों की आवश्यकता बढ़ती है। इससे पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों की परेशानी और बढ़ने की संभावना है।

भारतीय किसान संघ ने की सर्वे की मांग-
भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री शेखर पटेल ने कहा कि किसानों की महीनों की मेहनत बेमौसम बारिश ने बर्बाद कर दी है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल राजस्व और कृषि विभाग के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने तथा कंडिका 6/4 के तहत जहां नुकसान हुआ है, वहां उन किसानों को तत्काल राहत की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई तो किसान आर्थिक संकट में घिर सकते हैं।

कृषि विभाग के उप संचालक गोपेश पाठक का कहना है बारिश व नमी के कारण गेहूं की चमक प्रभावित हो सकती है। हालांकि उत्पादन में अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है।

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