बेटी बनकर पली ‘लक्ष्मी’ गाय का हुआ विवाह, पूरे गांव ने निभाई कन्यादान की परंपरा

बैंड-बाजे के साथ निकली बारात, पूरा गांव बना बाराती
पांच दिनों तक निभाई विवाह की सभी रस्में, घर-घर बांटी पत्रिका
हाटपीपल्या (नरेंद्र ठाकुर)। नगर से करीब 19 किलोमीटर दूर ग्राम कवड़िया में बसंत पंचमी के अवसर पर एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। यहां घर में बेटी की तरह पाली गई एक गाय का विवाह पूरे सनातन रीति-रिवाजों के साथ किया गया।
इस अनूठे विवाह में गाय ‘लक्ष्मी’ को कन्या मानकर नंदी ‘पूर्णा’ के साथ विवाह बंधन में बांधा गया। खास बात यह रही कि इस विवाह में पूरा गांव बाराती बना और पांच दिनों तक विवाह की सभी पारंपरिक रस्में निभाई गईं।
ग्राम के लोकेंद्र जगन्नाथ सिंह सैंधव और उनकी पत्नी सीमा सैंधव ने यह अनूठा विवाह करवाया। अपने घर में पली गाय लक्ष्मी को कभी पशु नहीं, बल्कि बेटी का दर्जा दिया। इसी भाव से उन्होंने बसंत पंचमी पर उसका विवाह पूरे सम्मान और धूमधाम से करने का संकल्प लिया। जब यह विचार गांव में साझा हुआ, तो ग्रामीणों ने भी इसे अपना आयोजन मानते हुए तन-मन-धन से सहयोग किया। विवाह के लिए लोकेंद्र सैंधव ने अपने घर की रंगाई-पुताई भी करवाई।

ग्रामीणों ने मिलकर दूसरे गांव से नंदी खरीदा, जिसे ‘पूर्णा’ नाम दिया। विवाह को पूरी तरह पारंपरिक स्वरूप देने के लिए बाकायदा विवाह पत्रिका छपवाई गई।
पांच दिन चली विवाह की परंपरा-
19 जनवरी को खानेगार की रस्म निभाई गई, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। 21 जनवरी को विधिवत गणेश पूजन हुआ और मंगल कामना की गई। 22 जनवरी को मंडप सजाया गया और हल्दी की रस्म के दौरान गांव की महिलाओं ने मंगल गीत गाकर वातावरण को भावनात्मक बना दिया।
पूरे गांव की महिलाओं ने किया कन्यादान-
23 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन गाय लक्ष्मी और नंदी पूर्णा का विवाह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। पंडित नीतेश शर्मा ने सहयोगी पंडितों के साथ विवाह की संपूर्ण पद्धति कराई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने कन्यादान की परंपरा निभाई, जिसने हर मौजूद व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। गाय और नंदी को सुंदर पोशाक पहनाई गई, वहीं नंदी को पारंपरिक साफा बांधा गया। कन्यादान के दौरान लोकेंद्र सैंधव ने स्वर्ण व चांदी के आभूषण भी दिए।
बैंड-बाजे के साथ धूमधाम से निकली बारात-
विवाह से पूर्व पूरे गांव में बैंड-बाजों के साथ बारात निकाली गई। रास्ते भर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर बारात का स्वागत किया। जैसे ही बारात विवाह स्थल पहुंची, मंगल ध्वनियों और फूलों की वर्षा से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। पूरे मोहल्ले को रोशनी से सजाया गया, जिससे यह आयोजन किसी शाही विवाह से कम नहीं लगा।
इस अवसर पर गांव के बाहर से भी बड़ी संख्या में मेहमान पहुंचे। विवाह में शामिल सभी लोगों के लिए स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की गई। आयोजन में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा था।
कोई विशेष मन्नत नहीं थी-
विवाह कराने वाले लोकेंद्र सिंह सैंधव ने कहा, मेरी कोई विशेष मन्नत नहीं थी। गोमाता के प्रति श्रद्धा है। हमने लक्ष्मी को बेटी की तरह पाला है, तो मन में यह इच्छा जागी कि उसका विवाह भी पूरे सम्मान के साथ किया जाए। मेरा सभी से आग्रह है कि गाय को सड़कों पर भटकने के लिए न छोड़ें। गोमाता की उपेक्षा के दुष्परिणाम होते हैं। हर घर में एक गाय अवश्य पालनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कन्यादान में जो धन प्राप्त हुआ है, उसका उपयोग गाय व नंदी के चारा-भूसा आदि में करेंगे।




