भारतीय किसान संघ की बैठक में एकजुट होकर कार्य करने का लिया संकल्प
26 जनवरी से ‘भारत माता पूजन’ अभियान का शुभारंभ

देवास। जिले के टोंकखुर्द में भारतीय किसान संघ की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें संगठन की मजबूती, किसानों की लंबित समस्याओं और आगामी आंदोलनों की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में जिले व तहसील स्तर के पदाधिकारियों ने भाग लिया और किसानों के हित में एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
बैठक की शुरुआत परंपरागत रूप से ध्वज लगाकर की गई। इस अवसर पर सह संगठन मंत्री दिनेश शर्मा एवं जिला मंत्री शेखर पटेल ने कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन प्रदान किया। जिला मंत्री शेखर पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि 26 जनवरी से जिलेभर में ‘भारत माता पूजन’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत हर ग्राम समिति के माध्यम से प्रत्येक गांव तक पहुंचकर भारत माता पूजन किया जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे पूरी सक्रियता और समर्पण के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
सह संगठन मंत्री दिनेश शर्मा ने संगठनात्मक मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाने के लिए ग्राम समिति और तहसील समिति की मासिक बैठकें अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि संगठन की रीढ़ कार्यकर्ता होते हैं, इसलिए उनकी समस्याओं और जरूरतों की चिंता करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने मालवा प्रांत में इंदौर में बन रहे भव्य मंदिर और किसान भवन की जानकारी देते हुए बताया कि यहां सभी किसान भाइयों के लिए एक केंद्रीय कार्यालय भी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित किसानों और पदाधिकारियों से इस पुनीत कार्य में यथासंभव सहयोग करने की अपील की।
बैठक में किसानों की लंबे समय से लंबित नामांतरण संबंधी समस्याओं पर विशेष चर्चा की गई। किसानों ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी पर चिंता जताई, जिस पर संगठन द्वारा सामूहिक रूप से समाधान के लिए आंदोलनात्मक रणनीति बनाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही किसानों से जुड़े अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में जिला कार्यकारिणी सदस्य हुकुमचंद सेंधव, तहसील अध्यक्ष संजय जलोदिया, तहसील मंत्री अनुराग भंडारी, बरोठा तहसील अध्यक्ष ईश्वरलाल पटेल सहित हरीश मुकाती, रामनारायणजी, अशोकजी एवं मुकेश पटेल उपस्थित रहे। संगठन ने निर्णय लिया कि इसी तरह की बैठकें जिले की सभी सातों तहसीलों में आयोजित की जाएंगी, ताकि किसानों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझकर उनके समाधान की प्रभावी पहल की जा सके।




