क्या आपका मोटापा भी कंट्रोल से बाहर है?

– जानिए अमलतास अस्पताल में उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय इलाज
– 21 हजार सर्जरी करने वाले प्रसिद्ध बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. अपूर्व श्रीवास्तव से विशेष चर्चा
– 104 किलो वजन के मरीज की हुई सफल सर्जरी
देवास। मोटापा अपने आप में एक बड़ी बीमारी है। पूरी दुनिया में इसे कंट्रोल करना है। डब्ल्यूएचओ ने भी इस पर ध्यान दिया है। हिंदुस्तान में हर 10 में से 3 व्यक्ति इससे ग्रसित हैं। मोटापे से निजात मिलना बहुत आवश्यक है। मोटापा तो अपने आप में बीमारी है ही, साथ ही यह अन्य बीमारियों का भी घर है। जहां से अन्य बीमारियां जन्म लेती है। जैसे फैटी लिवर, डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कुछ प्रकार के कैंसर जो मोटापे के कारण हो सकते हैं। इसे देखते हुए हमारे पास यह मौका है कि हम जड़ पर जाए और मोटापे का प्रॉपर निदान करें और इन बीमारियों से बचें।
यह जानकारी बांगर (देवास) स्थित अमलतास सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ‘बैरिएट्रिक सर्जरी वर्कशॉप’ में आए विश्व प्रसिद्ध बैरिएट्रिक सर्जन डॉ. अपूर्व श्रीवास्तव ने दूरबीन पद्धति के जरिए 104 किलो वजन वाले मरीज की सफल सर्जरी के पश्चात दी। उन्होंने विशेष चर्चा में बताया कि यह एक ऐसी विधा है सर्जरी की जिसमें बहुत मोटापे वाले मरीजों का इलाज किया जाता है। यही इलाज अनकंट्रोल्ड डायबटिज या हाई ब्लड प्रेशर वाले पेंशेट का भी किया जाता है। बैरिएट्रिक सर्जर में वजन बहुत अच्छी तरह से कम हो जाता है।
दूरबीन पद्धति से होती है सर्जरी-
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि हमने शुक्रवार को जो सर्जरी की, उसमें पेंशेट का वजन लगभग 104 किलो था। मेरा मानना है कि तीन से चार महीने में इनका वजन करीब 65 से 70 किलोग्राम हो जाएगा। साथ ही साथ हन्हें डायबिटिज व हाई ब्लड प्रेशर से भी निजात मिल जाएगी। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि यह सर्जर दूरबीन द्वारा की जाती है। इसमें पेट की सर्जरी कर खाने की थैली का साइज छोटा कर देते हैं और अन्य प्रक्रिया की जाती है। यह दूरबीन से होती है और मरीज को एक दिन अस्पताल में रखकर दूसरे दिन छुट्टी दे देते हैं।
उन्होंने बताया इसमें पेशेंट को बहुत कम दर्द होता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को तरल डाइट 10 से 15 दिन लेनी होती है और बाद में छोटी मात्रा में नार्मल डाइट लेनी होती है। एक बार सर्जरी होने के 4 से 5 साल तक मोटापा नहीं बढ़ता है, लेकिन 5 से 7 प्रतिशत पेशेंट में मोटापा बढ़ने की आशंका रहती है। अगर ये पेशेंट खान-पान व रूटीन एक्सरसाइज का ध्यान रखे तो यह वजन हमेशा मेंटेन कर सकते हैं।
सर्जरी की बहुत कम दर-
डॅ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस सर्जरी में मेट्रो सिटी में 4 से 5 लाख रुपए का खर्च होता है, लेकिन अमलतास अस्पताल में बहुत ही कम दर पर यह सर्जरी कर रहे हैं। सर्जरी से पूर्व मरीज में बहुत डर बना रहता है और वे बहुत चिंतित रहते हैं लेकिन हम पेशेंट को शुरुआत से ही प्रॉपर फिटनेस व मेडिकल फिटनेस की प्रक्रिया में गुजारते हैं। मेडिकल फिटनेस होने पर सर्जरी के रिजल्ट बहुत अच्छे मिलते हैं।
21 हजार सर्जरी कर चुके हैं डॉ. श्रीवास्तव-
डॉ. श्रीवास्तव करीब 18 सालों से बैरिएट्रिक सर्जरी कर रहे हैं। उन्होंने अब तक करीब 21 हजार सफल सर्जरी की है। इस सर्जरी के बाद मोटापे से ग्रसित बड़ी संख्या में मरीज आज सेहतमंद जीवन यापन कर रहे हैं।
टीम में ये थे शामिल-
इस सफल सर्जरी में डॉ श्रीवास्तव के साथ डॉ. गौरव तिवारी, ओटी असिस्टेंट आनंद, पूजा परिहार, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. प्रेम, डॉ. फैजल, डॉ. बिंदिया की मुख्य भूमिका रही। साथ ही आयोजित वर्कशॉप में अमलतास विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. शरदचंद्र वानखेड़े, डीन डॉ. एके पिठवा, निदेशक डॉ. प्रशांत, डॉ. अभय गुप्ता उपस्थित रहे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधा-
अमलतास वेलफेयर सोसायटी के चेयरमैन ने कहा कि इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य लोगों को मोटापे के प्रति जागरूक करना और उन्हें आधुनिक एवं सुरक्षित उपचार विकल्पों की जानकारी देना है। अस्पताल अब क्षेत्र के लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर प्रदान कर रहा है।


