खेत-खलियान

आम के पेड़ों पर बौर की बहार, बंपर उत्पादन की उम्मीद

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– अपनी उच्च गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के लिए प्रसिद्ध है बेहरी का आम

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। आम के बागों में इस समय बौर (आम के फूल) की भरमार है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। इस साल मौसम अनुकूल रहने से आम की बंपर पैदावार की उम्मीद की जा रही है।

बेहरी के देसी आम अपनी उच्च गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के कारण देवास, इंदौर, उदयनगर, पुंजापुरा, पिपरी सहित आसपास के जिलों में काफी प्रसिद्ध हैं। यहां के किसान आम की खेती से न केवल छांव और हरियाली का आनंद लेते हैं, बल्कि अच्छी आमदनी भी प्राप्त करते हैं।

आम के फूलों से लदे पेड़-
जनवरी-फरवरी के महीने आम के बागों में फूलों के खिलने का समय होता है, जिसे स्थानीय भाषा में “बौर आना” कहा जाता है। इस बार पेड़ों पर भरपूर मात्रा में बौर आ रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि यदि मौसम अनुकूल रहा, तो आम की पैदावार अच्छी होगी।

आम के बगीचे वाले किसान हरीश उपाध्याय, मांगीलाल पाटीदार, विक्रम बागवान, हेमंत उपाध्याय आदि ने बताया कि एक पेड़ औसत 5 क्विंटल से 7 क्विंटल तक फल देता है, जबकि बड़े और अच्छी तरह से देखभाल किए गए पेड़ 10 क्विंटल से अधिक आम प्रदान कर सकते हैं। आम का उत्पादन पेड़ की उम्र, देखभाल, जलवायु और उर्वरक प्रबंधन पर निर्भर करता है। एक आम का पेड़ 30-40 साल तक फल देता है, जिससे यह वर्षों तक आय का स्रोत बनता है।

देसी आम की खासियत-
बेहरी के देसी आम अपनी सुगंध और स्वाद के कारण आसपास के जिलों में काफी प्रसिद्ध हैं। खासकर कैरी (कच्चे आम) से बनने वाला अचार अपने टेस्ट के लिए जाना जाता है।

बेहरी के आमों की विशेषता:

स्वाभाविक मिठास और सुगंध- बेहरी के आमों में प्राकृतिक मिठास होती है, जिससे इनकी बाजार में मांग बनी रहती है।

अचार और चटनी के लिए उपयुक्त- यहां की कैरी से बनने वाला अचार स्वादिष्ट और लंबे समय तक टिकाऊ होता है।

स्थानीय और बाहरी बाजारों में लोकप्रियता- बेहरी के आम देवास, इंदौर, उज्जैन और अन्य जिलों में भी भेजे जाते हैं। आम की खेती से किसानों को अच्छी आमदनी होती है।

 

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