भौंरासा में ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में उमड़ा जनसैलाब, सामाजिक समरसता का दिया संदेश

स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाकर स्वर्णिम भारत बनेगा- व्यास
भौरासा (मनोज शुक्ला)। नगर में आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में धर्म और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में नगर के सर्व समाज के 5000 से भी अधिक हिंदू धर्मावलंबियों ने सहभागिता कर एकता का परिचय दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना रहा।
प्रमुख संतों और वक्ताओं का मिला मार्गदर्शन-
सम्मेलन में आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की। संघ के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर नगर में एक भव्य विराट हिंदू सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। सन 1925 में संघ की स्थापना की गई थी। संघ ने हिंदू धर्म पर समर्पित अपने विचारों को लेकर अपनी यात्रा शुरू की थी, जो सन 2025 में 100 वर्ष पूर्ण कर आगे की यात्रा सतत रखे हुए है।
आज नगर के बाबा भंवरनाथ जी महाराज मंदिर प्रांगण में बाबा भंवरनाथ हिंदू सम्मेलन समिति द्वारा हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश वंदना के साथ हुई, जिसे दुर्गेश राठौर द्वारा गाया गया। इसके पश्चात संघ गीत का गायन बहन पलक एवं अंतिम पिता शांतिलाल कुमावत द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय कवि एवं जाग्रत मालवा पत्रिका के प्रधान संपादक देवकृष्ण व्यास, पंडित भगवताचार्य श्री सोहन जोशी तथा नगर दुर्गा वाहिनी से श्रीमती लाड़कुंवर तोमर मुख्य रूप से मंचासीन थे।
आयोजन के प्रारंभ में सर्वप्रथम भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन, गो माता पूजन एवं श्रीराम दरबार पूजन किया गया। साथ ही छोटे-छोटे बच्चों को श्रीराम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान एवं भारत माता के प्रतिरूप बनाकर मंच पर प्रस्तुत किया गया।
इसके पश्चात पधारे अतिथियों का परिचय हेमंत बंड द्वारा करवाया गया। कार्यक्रम का संचालन मनीष कुमावत ने किया एवं बाबा भंवरनाथ हिंदू सम्मेलन के संयोजक कन्हैयालाल खाटवा ने सभी का अभिवादन किया।

कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे समस्त हिंदू समाज के पुरुषों, महिलाओं एवं बच्चों का तिलक लगाकर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर की बहनों द्वारा स्वागत किया गया। इस दौरान नगर व आसपास के क्षेत्र से समस्त हिंदू मातृशक्ति एवं भैया-बहन सैकड़ों की संख्या में उपस्थित हुए और आयोजन को सफल बनाया।
आयोजन के दौरान मुख्य वक्ता व्यास ने अपने ओजस्वी शब्दों में देश में बने हिंदू समर्पित विचारों के दलों एवं परिषदों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज हम अपने बच्चों के लिए अच्छे स्कूलों की सोचते हैं और उन्हें विदेश पढ़ने के लिए भेज देते हैं, परंतु अब आवश्यकता है कि बच्चा विदेश जाए तो भी स्वामी विवेकानंद जी महाराज के विचारों को लेकर देशहित में कार्य करे। इसके लिए पहले अपने घर के माहौल को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म किसी धर्म या भाषा का विरोध नहीं करता, यही हमारी संस्कृति है। आज हम उस भारत माता की गोद में जीवन यापन कर रहे हैं, जहां हिंदू धर्म के तैंतीस कोटि देवी-देवताओं ने जन्म लेकर इस देश को पवित्र बनाया है। भारत हिंदू राष्ट्र है और रहेगा। अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि यदि हिंदू धर्म से संबंधित कहीं भी कोई आयोजन हो, तो बढ़-चढ़कर उसमें सहभागिता करें।

नगर दुर्गा वाहिनी से लाड़कुंवर तोमर ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत एक ऐसा देश है, जहां महिलाएं अपने धर्म और विचारों के साथ आगे बढ़ीं। रानी लक्ष्मीबाई, रानी अवंतीबाई, अहिल्याबाई होलकर एवं सावित्रीबाई फुले जैसी महिला क्रांतिकारी हिंदू धर्म की रक्षा हेतु बलिदान देने वाली महान विभूतियां रही हैं। आज महिलाएं भी सशक्त भारत में हर क्षेत्र में अपना संपूर्ण योगदान दे रही हैं।
भगवताचार्य पंडित सोहन जोशी (देवास) ने कहा कि प्रत्येक युग में धर्म के प्रति दानव अलग-अलग रूपों में आते रहे हैं। कलियुग में भी दानव हैं, पर उन्हें पहचानने और उनसे लड़ने की शक्ति हिंदू धर्म की एकजुटता में है। उन्होंने कहा कि जाति छोड़िए, हिंदू बनिए। आज के दानव को मारने के लिए जाति नहीं, हिंदू धर्म की शक्ति चाहिए।

पूरे आयोजन स्थल पर ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। अंत में भारत माता की सामूहिक आरती उतारी गई। इसके पश्चात सहभोज का आयोजन हुआ, जिसमें प्रसादी ग्रहण की गई। आभार प्रदर्शन नगर परसाई मनोज जोशी द्वारा किया गया।




