होली 2026 पर चंद्र ग्रहण का साया

जानिए कब होगा होलिका दहन और कब खेली जाएगी रंगों की होली
देवास। इस वर्ष होली और होलिका दहन की तिथियों को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसकी प्रमुख वजह फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण है।
ग्रहण और भद्रा काल के कारण आमजन में यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर होलिका दहन कब किया जाए और रंगों की होली किस दिन मनाई जाएगी।
देवास के ज्योतिषाचार्य पं. संदीप शास्त्री के अनुसार, इस बार पंचांग की स्थिति विशेष है, इसलिए शास्त्रीय नियमों के अनुसार ही निर्णय लेना आवश्यक है। 2 मार्च को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी, उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है, लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही ‘भद्रा’ का आगमन भी हो रहा है।
भद्रा का लंबा साया- 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर (सुबह 4:56 बजे) तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।
शुभ मुहूर्त का चयन- ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो, तो शास्त्रों में ‘भद्रा पुच्छ’ (भद्रा का पूंछ वाला भाग) में कार्य करने का विधान है। पं. शास्त्री जी के अनुसार, इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा।
शुभ मुहूर्त- रात 12:50 बजे से रात 2:02 बजे तक। अवधि: 1 घंटा 12 मिनट। इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है।
होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा- 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव (सूतक) भी पूरे देश में मान्य होगा।
ग्रहण का समय- भारतीय समय के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर लगभग 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ‘ब्लड मून’ का नजारा भी देखने को मिल सकता है।
सूतक काल और नियम- चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और खाना-पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में ‘होली का डंडा’ या रंग-गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है, इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।
रंगों की होली का असली उत्सव- 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन, यानी 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार, ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम-धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।
होली 2026:
होलिका दहन- रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक
3 मार्च- चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक।
सूतक काल- सुबह 6:20 बजे से शुरू
4 मार्च को रंग वाली होली- वसंत उत्सव के साथ सुबह से धुलेंडी मनाई जाएगी
ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय- सूतक लगने से पहले (3 मार्च सुबह) दूध, दही और पके हुए खाने में तुलसी के या कुशा जरूर डाल दें।
गर्भवती महिलाएं- ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ (सुई, कैंची) का इस्तेमाल करें। सभी सनातनियों को सूतक काल से ग्रहण पूर्ण होने तक जितना संभव हो बिना माला के भगवान का नाम जप करें!
स्नान और दान- ग्रहण खत्म होने के बाद (3 मार्च शाम 7 बजे के बाद) स्नान करें और सफेद वस्त्र, चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है।
मंत्र जाप- ग्रहण के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का या गुरु मन्त्र का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।




