खेत-खलियान

आलू का उत्पादन आधा, कम भाव से किसानों की बढ़ी चिंता

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बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। नकदी फसलों में शामिल आलू को किसानों की “लॉटरी फसल” माना जाता है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल अक्सर अच्छा मुनाफा देती रही है, लेकिन इस वर्ष तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है। उत्पादन में भारी गिरावट और बाजार में कमजोर भाव। दोहरी मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

बेहरी, गुराडिया, लखवाड़ा, नयापुरा, छतरपुरा, मालीपुरा, सेवनिया और रामपुरा क्षेत्र के किसानों ने बड़े पैमाने पर आलू की बुवाई की थी। पिछले वर्ष जहां प्रति बीघा 80 से 90 क्विंटल तक उत्पादन मिला था, वहीं इस बार उत्पादन आधे से भी कम रह गया है। किसानों का कहना है कि पहले लागत बीज का 10 गुना तक उत्पादन निकल आता था, जबकि इस वर्ष 5 गुना निकालना भी मुश्किल हो रहा है।

तापमान बना सबसे बड़ा कारण-
किसानों के अनुसार फसल के मध्यवर्ती समय में अचानक तापमान में गिरावट ने आलू की बढ़वार रोक दी। आलू की फसल को 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है, लेकिन जनवरी के पहले सप्ताह में करीब 15 दिनों तक तापमान 7 से 10 डिग्री के बीच बना रहा। इससे कंदों का विकास प्रभावित हुआ और उत्पादन घट गया।

किसान भोजराज दांगी, श्रीराम पाटीदार, महेंद्र दांगी, सूरज पाटीदार और रामचंद्र दांगी ने बताया कि लंबे समय बाद ऐसा हुआ है जब उत्पादन इतना कम निकला है।

मंडी में भी निराशा-
उत्पादन घटने के बावजूद किसानों को बेहतर दाम नहीं मिल पा रहा है। इस वर्ष थोक भाव केवल 5 से 7 रु प्रति किलो मिल रहा है, जबकि पिछले वर्ष यही आलू 15 से 16 रु प्रति किलो तक बिका था।

कृषि विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक डा. अशोक कुमार दीक्षित के अनुसार मालवा क्षेत्र में मौसम अनुकूल नहीं रहा, जबकि अन्य राज्यों और क्षेत्रों में बंपर उत्पादन हुआ है। मंडियों में बाहरी आवक अधिक होने से स्थानीय किसानों के आलू के भाव दब गए हैं।

चिप्स उद्योग की कम रुचि-
इस बार चिप्स बनाने वाले व्यापारियों ने भी खास रुचि नहीं दिखाई, जिससे मांग कमजोर रही और भाव नीचे आ गए। एक ओर मौसम की मार से उत्पादन घटा, दूसरी ओर बाजार में बाहरी आवक और कमजोर मांग ने दाम गिरा दिए। ऐसे में आलू किसानों के लिए यह सीजन घाटे का सौदा साबित होता दिख रहा है।

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