शोक, मोह और चिंता से मुक्ति का मार्ग है हरि भक्ति- आचार्य कमल नयन शास्त्री

देवास। मानव जीवन में सब कुछ होते हुए भी व्यक्ति शोक, मोह और चिंता जैसी वेदनाओं से घिरा रहता है। इनसे मुक्ति केवल हरि दर्शन और प्रभु भक्ति से ही संभव है।
यह बात कथावाचक आचार्य कमल नयन शास्त्री ने जय बाल हनुमान मंदिर, शिव शक्ति नगर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर कही।
साधना का लक्ष्य परमपुरुष के साथ एकत्व की अनुभूति प्राप्त करना है
कथा प्रारंभ होने से पूर्व व्यासपीठ का पूजन किया गया। आचार्य शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को प्रभु से जोड़ने का माध्यम है। जब व्यक्ति कथा पंडाल में पहुंचकर भक्ति रस में लीन होता है, तब उसके मन की पीड़ाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की मटकी फोड़ लीला का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि मटकी मानव के भीतर मौजूद मोह और माया का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण ने मटकी फोड़कर यह संदेश दिया कि मनुष्य को मोह-माया त्यागकर प्रभु भक्ति की ओर बढ़ना चाहिए।
कथा के दौरान गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
आचार्य जी ने अपने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने बताया कि आगामी कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। पं. अरुण मिश्र ने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन दोपहर 3 बजे मंदिर परिसर में पहुंचकर कथा श्रवण करने की अपील की।
जहां अहंकार होता है वहां विनाश निश्चित है, प्रेम ही जीवन का आधार- आचार्य कमलनयन शास्त्री




