जहां अहंकार होता है वहां विनाश निश्चित है, प्रेम ही जीवन का आधार- आचार्य कमलनयन शास्त्री

देवास। जब-जब पृथ्वी पर अहंकार और अत्याचार बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर अधर्म का नाश किया है। व्यक्ति को जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि जहां अहंकार होता है वहां सर्वनाश निश्चित होता है और जहां प्रेम होता है वहां भगवान का वास होता है।
यह उद्बोधन जय बाल हनुमान मंदिर शिव शक्ति नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस व्यास पीठ से आचार्य कमलनयन शास्त्री ने दिए। – भागवत कथा से ही मिलता है सच्चे सत्संग का मार्ग
उन्होंने प्रहलाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष और राम जन्म प्रसंग का संक्षिप्त वर्णन करते हुए कहा कि जब मनुष्य के भीतर प्रेम और समर्पण का भाव जागृत होता है, तब उसे संतों के चरण और ईश्वर की शरण प्राप्त होती है। संतों का सान्निध्य और भगवान की भक्ति ही जीव के जीवन का कल्याण करती है।
कथा के दौरान आचार्यश्री ने भजनों के माध्यम से भगवान की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। इसके पश्चात कृष्ण जन्मोत्सव की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर झूम उठे और पूरा पांडाल जयकारों से गूंजायमान हो गया।
महाआरती के बाद प्रसादी वितरण किया गया। व्यास पीठ से बताया गया कि आगामी कथा में गिरिराज धरण, गिरिराज पूजा एवं 56 भोग प्रसंग का वर्णन किया जाएगा।




