धर्म-अध्यात्म

प्रदूषित मन व पर्यावरण दोनों मानव जाति के लिए खतरा- पुरोधा प्रमुख

Share

देवास। आनंद मार्ग प्रचारक संघ देवास के दीपसिंह तंवर ने बताया कि संघ का तीन दिवसीय विश्व स्तरीय धर्म महासम्मेलन आनंद नगर पुरूलिया में 22 से 24 मई तक संपन्न हुआ।

आनंद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित महासम्मेलन के अंतिम दिन प्रदूषण और मानसिक स्वास्थ्य विषय संगठन के पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वादेवानंद अवधूत ने विस्तृत रूप से बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में मानव सभ्यता पर्यावरण प्रदूषण एवं मानसिक प्रदूषण जैसे दो गहरे संकटों से जूझ रही है, प्रदूषण केवल वायु, जल, भूमि और ध्वनि तक सीमित नहीं है। बल्कि इसका प्रभाव मनुष्य के मन, भावनाओं और आध्यात्मिक जीवन पर भी पड़ रहा है।

आगे बोलते हुए कहा कि लोग भय, क्रोध, घृणा, संकीर्णता, भोगवाद और स्वार्थ मानसिक प्रदूषण के प्रमुख कारण है। ऐसी मानसिकता व्यक्ति की नैतिकता, विवेक को कमजोर करती है। समाज और प्रकृति के संतुलन को भी बिगाड़ती है। कई बार सामाजिक प्रदूषण भौतिक प्रदूषण से भी अधिक घातक सिद्ध होता है।

आनंद मार्ग प्रचारक संघ देवास के हेमेन्द्र निगम काकू ने बताया कि उक्त सम्मेलन में आचार्य मधुव्रतानंद अवधूत, आचार्य रामेन्द्रानंद अवधूत, आचार्य कल्याणमित्रानंद अवधूत, आचार्य नभातीतनन्द अवधूत, आचार्य पुष्पेन्द्रानंद अवधूत, आचार्य पुनयेशानंद अवधूत, आचार्य ब्रम्हबुद्धानंद अवधूत, आचार्य हृदयेश ब्रम्हचारी आदि भी उपस्थित थे।

पुरोधा प्रमुख ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित ध्यान-साधना और यम नियम आधारित नैतिक जीवन शाकाहारी भोजन और निस्वार्थ सेवा को आवश्यक बताया। संबंधित खबर: साधना का लक्ष्य परमपुरुष के साथ एकत्व की अनुभूति प्राप्त करना है

 

Back to top button