ग्रह दोष शांति और मोक्ष की कामना लेकर उज्जैन पहुंच रहे श्रद्धालु, जारी है सप्त सागर यात्रा-नौ नारायण के दिव्य दर्शन

देवास/इंदौर। पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर उज्जैन में धार्मिक आस्था का विशेष वातावरण बना हुआ है। सनातन सामाजिक रक्षा मंच के तत्वावधान में देवास, इंदौर सहित प्रदेशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर सप्त सागर और नौ नारायण की धार्मिक यात्रा कर रहे हैं। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं से पूजा-अर्चना करवाई जा रही है।संबंधित खबर: अधिक मास 2026: इस एक महीने में करें ये उपाय, बदल सकता है भाग्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में इन पवित्र स्थलों के दर्शन, दान और दीपदान से पुण्य लाभ, नवग्रह दोषों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्रख्यात पं. संदीप शास्त्री के मार्गदर्शन में देवास, इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों के श्रद्धालु अवंतिका नगरी (उज्जैन) में ‘नौ नारायण’ और ‘सप्त सागर’ के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा प्रत्येक सागर और नारायण स्थान पर पूर्ण विधि-विधान, मंत्रोच्चार और सात्विक परंपरा के साथ सभी श्रद्धालुओं से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करवाई जा रही है।
मोक्षदायिनी है ‘सप्त सागर’ की यात्रा:
जानिए किस सागर पर क्या दान दिलाएगा महापुण्य?
पं. संदीप शास्त्री ने सनातन धर्म में सप्त सागर यात्रा के अलौकिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अधिकमास में इन सात पवित्र सागरों की परिक्रमा और दर्शन से साधक के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। सप्त सागरों की यात्रा में प्रत्येक स्थान पर श्रद्धा अनुसार विशेष वस्तुओं के दान का विधान है, जो जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्यता लाता है।
रुद्रसागर (हरसिद्धि पाल के समीप): यहां नमक, श्वेत (सफेद) वस्त्र और चांदी की नंदी मूर्ति का दान करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
पुष्कर सागर (नलिया बाखल): यहां चने की दाल, स्वर्ण (सोना) और पीले वस्त्रों का दान करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और भाग्य का उदय होता है।
क्षीरसागर (नई सड़क): इस पवित्र स्थान पर साबूदाने की खीर और चांदी के बर्तनों का दान सुख-शांति का कारक बनता है।
गोवर्धन सागर (निकास चौराहा): यहां माखन, मिश्री, गेहूं और लाल वस्त्रों का दान करने से गोवंश और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है।
रत्नाकर सागर (उंडासा तालाब): सौभाग्य के प्रतीक (श्रृंगार सामग्री) का दान विशेष रूप से महिलाओं के अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए फलदायी है।
विष्णु सागर: साक्षात हरि नारायण की कृपा के लिए भगवान विष्णु की मूर्ति, आसन और गोमुखी माला का दान किया जाता है।
पुरुषोत्तम सागर: इस मुख्य केंद्र पर कांसे के पात्र (बर्तन) में ३३ मालपुए रखकर दान करने का विधान है, जो अटूट लक्ष्मी की प्राप्ति करवाता है।
नौ नारायण के दर्शन से दूर होंगे नवग्रह दोष-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में साक्षात विराजमान ‘नौ नारायण’ (भगवान विष्णु के नौ दिव्य रूप) के दर्शन मलमास में कल्पवृक्ष के समान फल देते हैं।
महात्म्य और लाभ: पं. शास्त्री के अनुसार, जो भी श्रद्धालु इस मास में नौ नारायण के चौखट पर शीश नवाता है, उसकी कुंडली के सभी नौ ग्रहों के दोष (नवग्रह दोष) स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। जीवन में चल रही अशांति, रोग और दरिद्रता का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि का वास होता है।
दीपदान और अन्नदान से तृप्त होंगे पितृ-
इस पावन मास में शिप्रा तट और सागरों के किनारे दीपदान व अन्नदान करने का विशेष महत्व है। सनातन सामाजिक रक्षा मंच के सदस्यों ने बताया कि अधिकमास में किया गया दीपदान अंधकारमयी जीवन को प्रकाश से भर देता है और इससे पितरों को परम शांति मिलती है। भगवान नारायण की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु इस पावन यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं और अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं। यह भी पढ़े – सप्तसागर, नवनारायण और 84 महादेव यात्रा शुरू
आरामदायक सफर: प्रतिदिन देवास से श्रद्धालुओं को लेकर गाड़ियां पूरी सुख-सुविधा के साथ उज्जैन धाम के लिए प्रस्थान करती हैं।
यदि आप भी इस अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पुण्य की डुबकी लगाना चाहते हैं और सप्त सागर नौ नारायण यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं- पं. संदीप शास्त्री (सनातन सामाजिक रक्षा मंच, देवास) संपर्क सूत्र: 7974531063/ 8359946955




