धर्म-अध्यात्म

जलगंगा और शब्दगंगा के संग शुरू हुआ संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण महोत्सव

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– 151 कलशों की यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र

देवास। अधिकमास के पावन अवसर पर नगर की सुख-समृद्धि एवं धर्म-पुण्यार्जन की कामना के साथ सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण महोत्सव का शुभारंभ सोमवार को भक्ति, श्रद्धा और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। पहले दिन जलगंगा (गंगापूजन) और शब्दगंगा (श्रीमद्भागवत कथा) का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का आयोजन मुक्ति मार्ग स्थित महाराष्ट्र समाज धर्मशाला में किया जा रहा है। यह भी पढ़ें : ग्रह दोष शांति और मोक्ष की कामना लेकर उज्जैन पहुंच रहे श्रद्धालु, जारी है सप्त सागर यात्रा-नौ नारायण के दिव्य दर्शन

औदुंबर वरिष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष महेंद्र उपाध्याय ने बताया कि महोत्सव के शुभारंभ पर प्रातःकाल वैदिक विधि-विधान से गणेश पूजन, शांतिपाठ एवं देवताओं का आव्हान किया गया। वैदिक आचार्य पं. मनीष पाठक एवं विप्र वैदिकों के मंत्रोच्चार के बीच श्रीमद्भागवत महापुराण के मुख्य यजमान सीमा महेंद्र दुबे द्वारा पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। 

गंगापूजन के साथ निकली कलश यात्रा-
प्रातः 9 बजे प्राचीन शनि मंदिर, मीरा बावड़ी से गंगापूजन के साथ कलश यात्रा प्रारंभ हुई। देवी गंगा का स्मरण कर पूजित कलशों को लेकर निकली यह शोभायात्रा तहसील चौराहा, नावेल्टी चौराहा सहित नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए महाराष्ट्र समाज धर्मशाला पहुंची।

151 मातृशक्तियों ने बढ़ाई यात्रा की शोभा-
कलश यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण 151 मातृशक्तियां रहीं, जिन्होंने एक समान आकर्षक परिधान धारण कर सिर पर कलश रखे और अनुशासित रूप से यात्रा में सहभागिता की।

भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। वहीं युवा वर्ग बैंड-बाजों और भक्ति संगीत की धुनों पर उत्साहपूर्वक झूमता नजर आया। नगर के विभिन्न स्थानों पर सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने कलश यात्रा का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।

श्री औदुंबर ब्राह्मण महासभा, वैश्य महासभा, चामुंडा सेवा समिति, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज देवास सहित अनेक संस्थाओं एवं नगरवासियों ने श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया।

भागवत महिमा का हुआ वर्णन-
कलश यात्रा के पश्चात दोपहर में भागवताचार्य पं. डॉ. दीपेश पाठक ने संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का शुभारंभ किया। कथा के प्रथम दिवस उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा, महत्व एवं श्रवण के पुण्य फल का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान का स्रोत है। कथा श्रवण से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है तथा अहंकार, क्रोध, लोभ और मोह जैसे विकारों का नाश होता है।

भागवताचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में भागवत कथा समाज को प्रेम, सद्भाव, सेवा और संस्कारों का संदेश देती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा को केवल सुनने तक सीमित न रखकर उसके आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। संबंधित खबर: जहां अहंकार होता है वहां विनाश निश्चित है, प्रेम ही जीवन का आधार

कथा के दौरान भक्ति गीतों और संगीतमय प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान धर्म, भक्ति, संस्कार और मानव जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। यह भी पढ़ें: प्रदूषित मन व पर्यावरण दोनों मानव जाति के लिए खतरा- पुरोधा प्रमुख

महोत्सव का समापन प्रतिदिन संगीतमय कथा, भजन एवं धार्मिक आयोजनों के साथ होगा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लेने का आग्रह किया है।

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