पर्यटन

विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभ्यारण बन रहा है पर्यटकों की नई पसंद

देवास जिले में स्थित खिवनी अभ्यारण बाघ एवं प्रकृति प्रेमियों को कर रहा है आकर्षित

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  • देवास जिले में स्थित खिवनी अभ्यारण बाघ एवं प्रकृति प्रेमियों को कर रहा है आकर्षित

देवास। यदि आपको घने जंगलों की शांति, पगडंडियों पर चलते हिरण, झाड़ियों में छिपे तेंदुए और प्रकृति की अनछुई सुंदरता आकर्षित करती है, शोर-शराबे से दूर, शुद्ध हवा में सांस लेना चाहते हैं तो खिवनी अभ्यारण्य आपका अगला इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन बन सकता है। देवास जिले में स्थित खिवनी अभ्यारण अपने अंदर प्रकृति की कई अनमोल धरोहर लिए हुए हैं। यहां की प्रकृति और आबोहवा प्रत्येक प्रकृति प्रेमी को अपने और खींचती है।

खिवनी अभ्यारण लगभग 134 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जिसमें देवास जिले में लगभग 89.9 वर्ग किमी का क्षेत्र आता है तथा सीहोर जिले का 44.8 वर्ग किमी का क्षेत्र आता है। देवास और सीहोर जिले की सीमा पर फैला लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला खिवनी अभ्यारण्य आज मध्यप्रदेश के उन चुनिंदा प्राकृतिक स्थलों में शामिल हो रहा है, जहां वन्य जीवन संरक्षण और पर्यटन के बीच अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है, जहां पर्यटकों का आगवानी और मेजबानी करने के लिए प्रकृति तैयार खड़ी है। इस अभ्यारण में एक ओर जहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ है, वन्यजीव आमजन को अपनी और आकर्षित कर रहे हैं। वहीं अभ्यारण में अनेक प्रकार की औषधीय पौधें भी है। खिवनी अभ्यारण में जाने के लिए  https://mpforest.gov.in/ecotourism/ecobooking/destination.aspx  के माध्यम से बुकिंग कर सकते हैं।

कलेक्टर ऋतुराज सिंह एवं डीएफओ देवास अमित सिंह चौहान द्वारा खिवनी अभ्यारण को पर्यटन के मानचित्र पर वृहद स्तर पर पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इनके द्वारा लगातार खिवनी अभ्यारण की मॉनिटरिंग की जा रही है तथा पर्यटकों की व्यापक तैयारी करने के निर्देश भी संबंधितों को दे रहे हैं।

खिवनी अभ्यारण्य

वैसे तो अभ्यारण्य वन्यप्राणियों की सुरक्षा हेतु बनाया गया था, परन्तु वर्षाकाल में अभ्यारण्य के अंदर बहने वाली नदी-नाले एवं पर्वत-घाटियां आदि देखकर कोई भी व्यक्ति इसकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता। विचरण करना मानव का नैसर्गिक स्वभाव होता है। इसके लिए वह अभ्यारण्य की सुन्दरता को देखते हुए अपने आपको यहां आने से नहीं रोक सकता। अभ्यारण्य के अंदर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यह क्षेत्र भोपाल एवं इंदौर के बीच स्थित होने तथा इसके आसपास अन्य पर्यटन क्षेत्र होने के कारण अभ्यारण्य का अपना अलग महत्व है। पर्यटक अभ्यारण्य में आने पर वन्यप्राणियों के साथ-साथ यहां के सुन्दर दृष्यों का भी अवलोकन कर सकता है। खिवनी अभ्यारण में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में पर्यटक आ रहे हैं तथा यहां प्राकृतिक सौंदर्यता की प्रशंसा किए बगैर नहीं थकते हैं। यह अभयारण्य जामनेर नदी के उद्गम स्थल होने के साथ विंध्य पहाड़ियों का मनोरम दृश्य समेटे हुए है। यह अपने नदी-नालों, पर्वत घाटियों और घने जंगलों के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर वर्षाकाल में इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार, यह प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है।

इन वन्यजीव को देखते हैं खिवनी अभ्यारण में-

यहां मुख्य रूप से मांसाहारी जीवों में बाघ, तेन्दुआ, जंगल केट, भालू, सोन कुत्ता, लकड़बग्घा, गोल्डल जैकॉल, एशियन डेजर्ट फॉक्स, एशियन पाम सीवेट, इंडियन स्मॉल सीवेट, सेही, नेवला, सर्प आदि तथा शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, कृष्णमूग, चौसिंगा, नीलगाय, जंगली सुअर, खरहा आदि प्रमुख रूप से पाये जाते है। पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां जिनमें दूधराज, मोर, नौरंगा, सरकिर मालकोहा, स्वेलों, मार्टिन, मुनिया, फिंच, रोबिन, बेबलर, बुलबुल, मॉटेल्ड आउल, शिकरा, हनी बजार्ड, ईगल, इजिप्शीयन वल्चर आदि प्रमुख है। इसी प्रकार तितलियों की लगभग 65 प्रजातियां अभयारण्य में पाई जाती है। विंध्याचल की श्रेणियों से घिरा इको व्यू पॉइंट अपनी प्रतिध्वनि के लिए प्रसिद्ध है, तो वहीं गोल कोठी और खिवनी मिडो जैसे स्थान शाकाहारी एवं मांसाहारी जानवरों को करीब से देखने का अवसर प्रदान करते हैं। इसके अलावा, दिसंबर तक बहने वाले शंकर खो और भदभदा झरने, भूरी घाटी का पेट्रोलिंग कैंप और दौलतपुर घाटी के घने जंगल इस अभयारण्य को मध्य प्रदेश का एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनाते हैं।

ठहरने की व्यवस्था-

खिवनी अभ्यारण्य में पर्यटकों के ठहरने के लिए सर्व सुविधा युक्त टूरिस्ट कैम्पस बनाया गया है, जिसकी चारों ओर से 03 मीटर ऊंची चैन लिंक फैंसिंग पर्यटकों सुरक्षा के लिए की गई है। उक्त कैम्पस में कॉटेज, लाइन क्वाटर एवं टेंट ठहरने के लिए उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त पर्यटकों के लिए पैगोडा, वॉच टॉवर भी बनाये गये है। कैम्पस में पर्यटकों के भोजन करने के लिए किचन सेड (मेस) उपलब्ध है। पर्यटकों के लिए भोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर समिति द्वारा उपलब्ध है। जंगल सफारी हेतु वाहन उपलब्ध है।

ईको पर्यटन और स्थानीय रोजगार

खिवनी अभ्यारण्य में ईको पर्यटन विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय समुदाय को रोजगार से जोड़ने की पहल की गई है। जिसमें समिति आधारित प्रबंधन-भोजन, चाय और नाश्ते की व्यवस्था स्थानीय समिति के माध्यम से की जा रही है, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि हुई है। सफारी संचालन-टाटा योद्धा और जिप्सी वाहनों के माध्यम से सफारी संचालन से स्थानीय चालकों और गाइडों को रोजगार मिल रहा है। आवास प्रबंधन-कॉटेज और टेंट हाउस के रखरखाव और पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था ईको विकास समिति द्वारा की जाती है। जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। लघु उद्योग-समितियों के माध्यम से दोना-पत्तल निर्माण और लकड़ी की कलाकृतियों (जैसे लकड़ी की घंटी) का कार्य किया जा रहा है, जिससे महिलाओं और कारीगरों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। बहुउद्देशीय उपयोग- शासकीय कार्यों(प्रशिक्षण/सेमीनार) के अलावा रिक्त समय में पर्यटकों हेतु आवास उपलब्ध कराकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

पर्यटन

1. बाल गंगा मंदिर खिवनी: खिवनी स्थित यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है तथा इसमें स्थापित शिवलिंग के बारे में स्थानीय ग्रामीणों की मान्यता है कि यह हर साल एक तिल के बराबर बढ़ जाता है। बाल गंगा में पूरे वर्ष अज्ञात स्थान से स्वच्छ पेय जल का प्रवाह अपने आप में चमत्कार है।

2. कलम तलई सन सेट पाइंट: कक्ष क्र. 207 में स्थित पेट्रोलिंग कैम्प एवं वॉच टावर है, जो कि समुद्र सतह से लगभग 1500 फीट की ऊंचाई पर है एवं अभ्यारण्य के सबसे उंचे स्थानों में से एक है। इस पर चढ़कर चारों ओर का अत्यंत सुंदर दृश्य दिखाई देता है एवं वन्यप्राणी एवं विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देखा जा सकता है, साथ ही यह स्थान अभ्यारण के सन सेट पाइंट के रुप में भी प्रसिद्ध है।

3. वॉचटावर: कक्ष क्र. 205 में स्थित लगभग 50 वर्ष पुराना लोहे का बना वॉच टावर है, जो कि लगभग 25 फीट उॅंचा है इस पर चढ़कर चारों ओर का अत्यंत सुंदर दृष्य दिखाई देता है एवं वन्यप्राणी एवं विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देखा जा सकता है।

4. ईको व्यू पाइंट: खिवनी दौलतपुर मार्ग पर स्थित इस स्थान से पर्वत श्रृंखलाओं, घांटियों एवं जामनेर नदी का अत्यंत विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यह स्थान तीनों ओर से विंध्याचल पर्वत मालाओं से घिरा हुआ है। जिसके कारण यहां से आवाज लगाने पर प्रति ध्वनि सुनाई देती है।

5. गोलकोठी: बालगंगा नदी के किनारे लगभग 80 वर्ष पुराना पत्थर का एक गोल कमरा बना हुआ है जहां से वन्यप्राणियों का पूर्व में शिकार हेतु उपयोग किया जाता था। वर्तमान में इस स्थान से वन्यप्राणियों एवं पक्षियों को बालगंगा नदी में अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है।

6. मिडो: बीट खिवनी पश्चिम के कक्ष 204-ए घास के मैदान, खिवनी मिडो में स्वछंद रुप से मांसाहारी एवं शाकाहारी वन्य प्राणियों को विचरण करते देखा जा सकता है।

7. शंकर खो व भदभदा झरना: कक्ष क्र. 212 दौलतपुर एवं 198 कुण्डीखाल में जामनेर नदी पर प्राकृतिक झरने है जो दिसम्बर माह तक प्रवाहमान रहते है तथा पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है।

8. भूरी घाटी: कक्ष क्र. 196 (सीहोर) में एक पैट्रोलिंग कैम्प बना हुआ है जहां पर वन्यप्राणी अकसर देखे जा सकते हैं।

9. अन्य स्थान: वन विश्राम गृह खिवनी, सर्कुलर रोड, दौलतपुर घाटी, भेरूखो (कक्ष क्र. 212) ऐसे स्थान है जो कि घने वनों से आच्छादित हर किसी पर्यटक को आकर्षित करने में सक्षम है।

अभ्यारण्य तक कैसे पहुंचा जाए-

1. भोपाल-इन्दौर मार्ग पर स्थित आष्टा से खिवनी अभयारण्य पहुंचा जा सकता है। आष्टा से दूरी 35 किमी. है।

2. इन्दौर-नेमावर-हरदा मार्ग पर स्थित कन्नौद से कुसमानिया होकर खिवनी अभयारण्य पहुंचा जा सकता है इन्दौर से कन्नौद की दूरी 100 किमी. तथा कन्नौद से अभयारण्य की दूरी 35 किमी. है।

3. भोपाल तथा इन्दौर हवाई मार्ग तथा रेलमार्ग से जुडे हैं। इसी प्रकार हरदा रेलमार्ग द्वारा जुडा हुआ है। हरदा से कन्नौद की दूरी 56 किमी. है।

6. समीपस्थ रेलवे स्टेशन हरदा है।

7. समीपस्थ एयरपोर्ट इन्दौर तथा भोपाल है।

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