धर्म-अध्यात्म

सुरगुरु की उपासना करों, वह काया के बंधन से मुक्त कर देगा- सद्गुरु मंगल नाम साहेब

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देवास। जितनी भी देह है, जैसे मानव देह, चींटी, हाथी सभी एक काया नगर है। इन सभी का स्वामी स्वर ही है इसलिए स्वर की ही उपासना करों। स्वर विदेही है, इसमें अपने चित्त को लगा लो, तो काया के सारे बंधन समाप्त हो जाएंगे।

यह विचार सद्गुरु मंगल नाम साहेब ने सद्गुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थली सेवा समिति मंगल मार्ग टेकरी द्वारा आयोजित गुरु वाणी पाठ, गुरु शिष्य संवाद के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विदेही पुरुष सुरगुरु सब दुखों को हरने वाला है। परम तत्व में जाने के लिए काया नगर के इन सब अंधेरों की सीमाओं के पार जाना पड़ेगा। इन सीमाओं को हटा दो तो तुम असीम में ही खड़े हो। काया नगर में नौ दरवाजे हैं। नवतम नाम साहब का, नव तम यानी 9 अंधेरे की व्याख्या की जाए तो कई ग्रंथ भर जाएंगे, लेकिन जब तक विदेही पुरुष सुरगुरु का सहारा ना लिया जाए तब तक इन काया नगर के अंधेरे में 84 लाख योनियों में यूं ही भटकते रहोंगे।

परमात्मा साहब ने जब सांसारिक जगत की रचना की तब यह पांच तत्व, तीन गुण का शरीर बनाया गया। इसमें श्वास की डोर डाली गई, मुक्ति के लिए। तुम्हारी मर्जी इंद्रियों की तरफ दौड़ना है, तो इंद्रियों की तरफ दौड़ों। कर्म की तरफ दौड़ना है, तो कर्म की तरफ दौड़ों। दर्शन की तरफ दौड़ना है, तो दर्शन की तरफ दौड़ों। रुचि की तरफ दौड़ना है, तो रुचि की तरफ दौड़ों, लेकिन पार नहीं लगा पाओंगे। इस सांसारिक भवसागर से पार लगना है तो सुरगुरु की ओर लौटो, श्वास की उपासना करो। जो सब अंधेरों के पार खड़ा है। जो सब सुखों का सागर है। जो इन काया नगर के बंधनों से मुक्त कर देगा। इस दौरान साध संगत द्वारा सदगुरु मंगल नाम साहब को नारियल भेंट कर एवं पुष्प मालाओं से सम्मान कर आशीर्वचन लिए। यह जानकारी सेवक वीरेंद्र चौहान ने दी।

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