नई शिक्षा नीति पर मंथन का मंच बनेगा देवास

- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और चुनौतियों पर 7 फरवरी को होगी शिक्षण संगोष्ठी
देवास। देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में लाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को ज़मीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए और इसमें आने वाली चुनौतियां क्या हैं इन अहम सवालों पर मंथन के लिए 7 फरवरी को देवास में एक वृहद शिक्षण संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी सेन थॉम एकेडमी, भोपाल रोड देवास में सुबह 11.30 बजे आयोजित होगी।
अशासकीय शिक्षण संस्था संचालक संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को शिक्षा जगत का “महाकुंभ” बताया जा रहा है, जिसमें स्कूल, कॉलेज, शिक्षा महाविद्यालयों के संचालक, प्राचार्य, शिक्षाविद, पत्रकार और बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
नीति बनाने वाली टीम के प्रमुख होंगे मुख्य वक्ता-
स्थानीय न्यू चिल्ड्रन होम स्कूल में आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के अध्यक्ष राजेश खत्री, उपाध्यक्ष सैयद मकसूद अली और सचिव दिनेश मिश्रा ने जानकारी दी कि संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की निर्माण समिति से जुड़े वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. अतुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली) मुख्य वक्ता होंगे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. एसके जैन (कुलपति, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल), प्रो. देव आनंद हिण्डोलिया (कुलपति, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल) एवं ओमप्रकाश शर्मा (राष्ट्रीय संयोजक, आत्मनिर्भर भारत, नई दिल्ली) शिक्षा के भविष्य पर अपने विचार रखेंगे।
पत्रकारों के सवालों के अध्यक्ष ने दिए घुमावदार अंदाज में जवाब-
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों द्वारा नई शिक्षा नीति को लेकर व्यावहारिक समस्याओं पर सवाल किए गए। पत्रकारों के सवालों पर अध्यक्ष राजेश खत्री ने सीधे जवाब देने से बचते हुए संतुलित और घुमावदार अंदाज में बात रखी। उन्होंने नीति के व्यावहारिक पक्षों की चुनौतियों की ओर इशारा तो किया, लेकिन किसी निष्कर्षात्मक टिप्पणी से परहेज करते हुए चर्चा को संगोष्ठी तक सीमित रखा।
अध्यक्ष राजेश खत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य अच्छा है, लेकिन इसे ज़मीनी स्तर पर लागू करना आसान नहीं है। स्कूलों के सामने संसाधन, प्रशिक्षण और संरचना जैसी कई चुनौतियां हैं। इस संगोष्ठी का उद्देश्य नीति की कमियां गिनाना नहीं, बल्कि समाधान तलाशना और व्यावहारिक मार्गदर्शन देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगोष्ठी के माध्यम से शिक्षण संस्थानों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि नीति के प्रावधानों को अपने संस्थानों में कैसे और किस चरण में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में शिक्षा नीति से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर खुली चर्चा होगी। स्कूल और कॉलेज संचालकों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम की जानकारी संगठन के मीडिया प्रभारी शकील कादरी, आदित्य दुबे और अबरार अहमद शेख ने संयुक्त रूप से दी।




