पर्यटन

खिवनी अभ्यारण्य: जहां जंगल जीवित है और प्रकृति खुद मेहमाननवाज है

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– यहां है वन्य जीव संरक्षण और पर्यटन के बीच अद्भुत संतुलन

– देवास के जनसंपर्क विभाग का खिवनी अभ्यारण्य सफारी टूर

देवास। यदि आप शोर-शराबे से दूर, शुद्ध हवा में सांस लेना चाहते हैं…। यदि आपको घने जंगलों की शांति, पगडंडियों पर चलते हिरण, झाड़ियों में छिपे तेंदुए और प्रकृति की अनछुई सुंदरता आकर्षित करती है… तो खिवनी अभ्यारण्य आपका अगला इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन बन सकता है।

देवास और सीहोर जिले की सीमा पर फैला लगभग 170 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला खिवनी अभ्यारण्य आज मध्यप्रदेश के उन चुनिंदा प्राकृतिक स्थलों में शामिल हो रहा है, जहां वन्य जीवन संरक्षण और पर्यटन के बीच अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।

जंगल, जो आज भी स्वच्छंद है-
खिवनी कोई बनावटी जंगल नहीं है। यह एक सजीव वन तंत्र (Live Ecosystem) है, जहां ऊंचे-ऊंचे साल, सागौन और मिश्रित वनस्पतियां हैं, जहां सुबह की धूप पत्तों से छनकर जमीन को छूती है, और जहां वन्य प्राणी इंसानों से नहीं, बल्कि प्रकृति से संवाद करते हैं।

यहां बड़ी संख्या में चीतल, हिरण, नीलगाय, सियार, तेंदुए और हाल के समय में बाघों की उपस्थिति भी दर्ज की गई है। हाल ही में देखे गए जंगली कुत्तों का जोड़ा इस बात का संकेत है कि खिवनी का इको सिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है।

इको-टूरिज्म, जो प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाता-
खिवनी अभ्यारण्य की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर्यटन प्रकृति के अनुकूल विकसित किया जा रहा है। यहां न तो शोर है, न भीड़… बल्कि एक ऐसा वातावरण है जहां पर्यटक प्रकृति के अतिथि होते हैं, मालिक नहीं।

वन विभाग द्वारा यहां जिप्सी सफारी की सुव्यवस्थित व्यवस्था है। इसका शुल्क 1500 रुपए है। परिवारों के ठहरने के लिए सर्व सुविधा युक्त गेस्ट हाउस और टेंट कैंप है, जिनका शुल्क 1500 रुपए से प्रारंभ होता है। स्थानीय स्वाद के अनुरूप भोजन की सुविधा भी यहां उपलब्ध कराई गई है, ताकि पर्यटक आराम के साथ जंगल को महसूस कर सकें।

खिवनी अभ्यारण्य

संरक्षण की सोच, जो भविष्य बनाती है-
खिवनी अभ्यारण्य का उद्देश्य केवल पर्यटकों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसा सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण तैयार करना है, जहां वन्य प्राणी स्वयं बसना चाहें। यहां हर निर्णय- सफारी रूट से लेकर ठहराव व्यवस्था तक वन्य जीवन के हित को प्राथमिकता में रखकर लिया गया है। वन विभाग की टीम, रेंजर, डिप्टी रेंजर और वनरक्षक निरंतर निगरानी और संरक्षण में लगे हुए हैं, ताकि यह जंगल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रह सके।

तो खिवनी आइए, जहां हर पेड़ एक कहानी कहता है, जहां हर पदचिह्न वन्य जीवन की उपस्थिति का संकेत देता है, और जहां जंगल आज भी…जंगल जैसा है।

प्रशासन, मीडिया और जंगल- एक साझा अनुभव-
मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म मानचित्र पर तेजी से उभरता खिवनी अभ्यारण्य आज केवल एक जंगल नहीं, बल्कि संरक्षण, संवेदनशील प्रशासन और जिम्मेदार पर्यटन का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। इसी सोच को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला जनसंपर्क विभाग, देवास द्वारा एक दिवसीय विशेष खिवनी अभ्यारण्य सफारी टूर का आयोजन किया गया। यह टूर महज भ्रमण नहीं था, बल्कि जंगल के भीतर पलते जीवन, विकसित होते इको सिस्टम और प्रशासनिक संरक्षण की उस प्रक्रिया को समझने का अवसर था, जो आमतौर पर पर्दे के पीछे रहती है।

जिला जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष टूर में पत्रकारों को खिवनी अभ्यारण्य के भीतर ले जाकर यह बताया गया कि किस प्रकार वन विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय अमला मिलकर इस क्षेत्र को सुरक्षित और समृद्ध बना रहे हैं।

इस अवसर पर कलेक्टर ऋतुराज सिंह की मंशा स्पष्ट रूप से दिखाई दी, पर्यटन के साथ-साथ संरक्षण, प्रचार के साथ संवेदनशीलता और विकास के साथ प्रकृति का संतुलन। जिला वन अधिकारी अमित सिंह चौहान के मार्गदर्शन में अभ्यारण्य की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी गई।

जंगल की जानकारी-
सफारी के दौरान एसडीओ (वन) विकास मौहरे एवं रेंज ऑफिसर भीमसिंह सिसोदिया ने पत्रकारों को खिवनी के वन्य जीवन से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि यह लगभग 170 वर्ग किलोमीटर में फैला घना वन क्षेत्र है, जहां आज चीतल, हिरण, नीलगाय
सियार और बड़ी संख्या में तेंदुए तथा कुछ क्षेत्रों में बाघों की सक्रिय उपस्थिति दर्ज की गई है। खिवनी का प्राकृतिक संतुलन लगातार मजबूत हो रहा है।

रेंज ऑफिसर भीमसिंह सिसोदिया ने बताया कि खिवनी में लक्ष्य यह नहीं है कि वन्य प्राणी यहां लाए जाएं, बल्कि ऐसा सुरक्षित और शांत वातावरण विकसित किया जा रहा है कि वे स्वयं यहां बसें।
इको-टूरिज्म की सुव्यवस्थित सुविधाएं खिवनी अभ्यारण्य में पर्यटन को पूरी तरह इको-फ्रेंडली मॉडल पर विकसित किया गया है। यहां उन्होंने बताया यहां जिप्सी सफारी की सुविधा है। ठहरने हेतु गेस्ट हाउस और टेंट कैंप तथा गुणवत्तापूर्ण स्थानीय भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है, ताकि पर्यटक प्रकृति के करीब रहते हुए भी सुविधा से समझौता न करें।

जमीनी अमले की अहम भूमिका-
खिवनी अभ्यारण्य के संरक्षण और विकास में वनरक्षक कृषिकांत वर्मा, डिप्टी रेंजर श्याम अवतार सहित पूरा मैदानी अमला निरंतर सक्रिय है। यही टीम दिन-रात जंगल की निगरानी, वन्य प्राणियों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में जुटी है। जिला जनसंपर्क अधिकारी आकाश जैन का पूरा मार्गदर्शन इस दौरान पत्रकारों को मिला।

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