बुजुर्ग अपने अनुभवों के खजाने से समाज और परिवार का मार्गदर्शन करते हैं- ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी

देवास। गौरवपूर्ण वृद्धावस्था अभियान के अंतर्गत राजोदा रोड स्थित वृद्ध आश्रम में लगभग 100 वरिष्ठजनों का सम्मान समारोह श्रद्धा, सम्मान एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी प्रेमलता दीदी ने की। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने समाज की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “आज समाज की स्थिति ऐसी हो गई है कि एक कुआँ चार कुओं को तो संपन्न करता है, लेकिन समय आने पर चार कुएँ मिलकर भी एक कुएँ को संपन्न नहीं कर पाते।”
उन्होंने कहा कि आज के समय में अनेक वृद्धजन स्वयं को अकेला महसूस करते हैं, जबकि परमात्मा सदैव उनके साथ होते हैं। बुजुर्ग स्वयं को वृद्ध न समझें, बल्कि अनुभवों की खान मानें, क्योंकि बुजुर्ग अपने अनुभवों के खजाने से परिवार और समाज का मार्गदर्शन करते हैं।
प्रेमलता दीदी ने आगे कहा कि जीवन की गुणवत्ता हमारी सोच पर निर्भर करती है, इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं। सकारात्मक सोच से व्यक्ति स्वयं को खुश, संतुष्ट और ऊर्जावान रख सकता है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से हम अपनी सोच को अत्यंत शक्तिशाली, सकारात्मक और ऊर्जावान बना सकते हैं।
उन्होंने संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका 104 वर्षीय दादी जानकीजी का उदाहरण देते हुए बताया कि दादीजी सदा उमंग, उत्साह और ऊर्जा से परिपूर्ण रहती थीं। उन्होंने कभी स्वयं को वृद्ध नहीं समझा और अपने सकारात्मक दृष्टिकोण एवं आध्यात्मिक शक्ति से सभी को निरंतर प्रेरणा देती रहीं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में माँ चामुंडा सेवा समिति के समाजसेवी रामेश्वर जलोदिया, नरेंद्र मिश्रा, उम्मेदसिंह राठौड़, प्रेमनाथ तिवारी, वृद्धाश्रम की संचालिका संगीता एवं दिनेश चौधरी उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान लगभग 100 वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया। उन्हें सम्मान स्वरूप तिलक, दुपट्टा, माला, प्रेरणादायी स्लोगन एवं ईश्वरीय सौगात भेंट की गई।
इस अवसर पर एडवोकेट मनोज श्रीवास्तव, संगीता यादव, महिमा जैन, सुनील भाई, बद्री भाई, अफजल भाई, ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी, अपुलश्री दीदी, हेमलता वर्मा बहन, निपुनिका बहन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




