कथा श्रवण कर जीवन में पालन करें- स्वामी रामनारायण जी

देवास। कथा श्रवण कर जीवन में पालन करें। यह विचार श्री रामद्वारा में चातुर्मास सत्संग के अंतर्गत भागवत कथा के अंतिम दिन स्वामी रामनारायण जी ने प्रकट किए।
उन्होंने कहा, कि कथा कितनी देर या कितने दिन सुनी यह महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन कथा जीवन में कितने दिन रहती है यह महत्वपूर्ण है। कथा को श्रवण कर जीवन में अपनाना चाहिए तभी जीवन सार्थक होगा।
दत्तात्रेय भगवान के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा, कि उनके चौबीस गुरु थे। जीवन में गुरु ही हमें सही मार्ग बताते हैं। राजा परीक्षित ने शुकदेव मुनि से कथा सुनकर मोक्ष प्राप्त किया। प्रत्येक व्यक्ति को अपने निर्धारित कर्तव्य का पालन करते हुए ईश्वर की भक्ति करना चाहिए। सुख-दुख जीवन के अंदर आते-जाते रहते हैं लेकिन जो व्यक्ति ईश्वर की भक्ति करता है वह सुख और दुख दोनों में समान भाव से जीवन यापन कर पाता है। उन्होंने भक्तजनों से कहा, कि घर एवं अपने आसपास पौधे लगाए एवं उनको बड़ा भी करें। पक्षियों, गौ माता को नियमित रूप से अन्न व जल दें।

व्यासपीठ का पूजन रामद्वारा सत्संग मंडल के सभी सदस्यों ने किया। रविवार की रात्रि को जागरण होगा। सोमवार को गीता पाठ होगा। कथा में सहयोग के लिए संत राम सुमिरन जी ने सभी का आभार माना।





