प्याज के गिरते दाम से किसान चिंतित, लागत तो दूर मजदूरी भी नहीं निकल रही

सिरोल्या (अमर चौधरी)। क्षेत्र के प्याज उत्पादक किसान इन दिनों भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। मंडियों में प्याज के दाम रिकॉर्ड स्तर तक गिर जाने से किसानों को लागत तो दूर, छंटाई और मजदूरी तक नहीं निकल पा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई किसान प्याज बेचने के बजाय खेत या घर पर ही फसल छोड़ देने पर मजबूर हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि प्याज की खेती हमेशा से महंगी और जोखिम भरी रही है। इसकी बुवाई से लेकर शेड बनाने तक काफी खर्च आता है। चद्दर के नीचे प्याज रखने के लिए किसानों को बल्ब, नीचे-ऊपर पंखे लगाना पड़ते हैं, ताकि प्याज सुरक्षित रहे। इसके बावजूद खराब होने पर अतिरिक्त मजदूरी भी लगती है।
लेकिन इस वर्ष प्याज का भाव इतना कम है कि मेहनत-पैसा सब डूबता नजर आ रहा है। मंडी में प्याज केवल 300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि केवल छंटाई पर ही 500 रुपये से अधिक मजदूरी और भाड़ा खर्च हो जाता है। सीधे शब्दों में, किसान 3 से 4 रुपये किलो के भाव पर प्याज बेच रहे हैं, जो उनकी लागत से बहुत नीचे है।
किसान राकेश खिरनी, सिंगाराम मंडलोई, अर्जूनसिंह और सुमेरसिंह का कहना है कि वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई किसानों की फसल मंडियों तक पहुंचने से पहले ही नुकसान में चली जाती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि गिरते दामों पर तत्काल ध्यान दिया जाए और राहत उपाय लागू किए जाएं, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।




