घरों में गूंजे गायत्री मंत्र, यज्ञ से सद्गुण अपनाने का लिया संकल्प
चामुंडा नगर में पावन गृह-गृह गायत्री महायज्ञ का आयोजन, नशामुक्ति और गायत्री साधना से जुड़ने का संकल्प

देवास। चामुंडा नगर में श्रावण माह के दौरान 26 घरों में गायत्री मंत्रों की गूंज के साथ पावन गृह-गृह गायत्री महायज्ञ संपन्न हुए।
अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित इन यज्ञों के माध्यम से परिवारों को भारतीय संस्कृति, सद्प्रवृत्तियों और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने का संदेश दिया गया। आयोजन के दौरान यजमान परिवारों ने नशामुक्ति सहित विभिन्न बुराइयों का त्याग करने और गायत्री साधना से जुड़ने के संकल्प भी लिए।
यह आयोजन मातृ जन्म शताब्दी वर्ष 2026 के अंतर्गत किया गया। गायत्री परिवार के मीडिया प्रभारी विक्रमसिंह चौधरी ने बताया कि श्रावण माह में गायत्री परिजनों ने उत्साह के साथ चामुंडा नगर के 26 घरों में गृह-गृह गायत्री महायज्ञ संपन्न कराए। इस दौरान परिवारों को गुरुदेव का साहित्य, देव स्थापना का चित्र तथा गायत्री मंत्र लेखन की पुस्तिका भी भेंट की गई।
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यज्ञ के दौरान गायत्री परिवार के जिला युवा समन्वयक प्रमोद निहाले एवं केंद्रीय वरिष्ठ कार्यकर्ता महेश आचार्य ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में अच्छी आदतों और सकारात्मक विचारों को अपनाने का माध्यम भी है। यज्ञ में दक्षिणा के रूप में एक बुराई छोड़ने और एक अच्छाई अपनाने का संकल्प लिया जाता है। इससे परिवार में धीरे-धीरे सत्प्रवृत्तियों का विकास होता है और सकारात्मक वातावरण बनने लगता है।
गायत्री परिवार की सरिता पाटीदार एवं लता खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गायत्री और यज्ञ को परिवार निर्माण का आधार माना गया है। नियमित गायत्री साधना और यज्ञ से घर में धार्मिक एवं सकारात्मक वातावरण निर्मित होता है, जिसका प्रभाव परिवार के सदस्यों के विचार और व्यवहार पर भी पड़ता है।

आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में यजमानों ने नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। साथ ही नियमित गायत्री साधना से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। आयोजकों के अनुसार गृह-गृह यज्ञ का उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान को घर-परिवार के संस्कार और सामाजिक सुधार से जोड़ना है, ताकि परिवारों में सद्भाव, संयम और सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा मिले।
आयोजन को सफल बनाने में यज्ञाचार्य रामनिवास कुशवाह, ओ.पी. श्रीवास्तव, प्रदीप दुबे, विक्रमसिंह राजपूत, देवीशंकर तिवारी, दिलीपसिंह सोलंकी, सुरेश बालपांडे, सालिगराम सकलेचा, कांतिलाल पटेल, ज्ञानदेव बोडखे, दुर्गा पटेल, श्रद्धा निहाले, नंदिनी, अन्नू पटेल, छबि, लक्ष्मण पटेल, कार्तिक लोधी, अंशराज सहित अनेक गायत्री परिजनों का सहयोग रहा। महिला मंडल की शीला श्रीवास्तव, तारा चौहान एवं शकुंतला ने सहयोगियों और यजमान परिवारों का आभार व्यक्त किया।




