भागवत कथा के श्रवण से मिलती है परमात्मा की कृपा- महंत स्वामी रामनारायण
सात दिवसीय कथा में राजा परीक्षित को मोक्ष प्राप्ति और दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का किया वर्णन

देवास। श्री रामद्वारा में आयोजित भागवत कथा का समापन धार्मिक वातावरण में हुआ। समापन अवसर पर महंत स्वामी रामनारायण जी ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से परमात्मा की कृपा प्राप्त होती है। यह कथा मनुष्य की आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अग्नि में सीका हुआ बीज अंकुरित नहीं होता, उसी प्रकार निरंतर ईश्वर का स्मरण करने से मन में माया के विकार अंकुरित नहीं होते।
महंत जी ने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन में ईश्वर भक्ति के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। दिन में जब भी समय मिले, उसे ईश्वर के भजन और नाम स्मरण में लगाना चाहिए। निरंतर नाम स्मरण से मन को शांति और जीवन को आध्यात्मिक दिशा मिलती है।
कथा के दौरान शुकदेव मुनि और राजा परीक्षित के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित के विभिन्न प्रश्नों और मन के संशयों का समाधान शुकदेव मुनि ने सात दिनों में किया। भागवत श्रवण के माध्यम से राजा परीक्षित ने मोक्ष प्राप्त किया।
दत्तात्रेय प्रसंग का वर्णन करते हुए महंत जी ने बताया कि भगवान दत्तात्रेय ने अपने जीवन में 24 गुरुओं से शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कहा कि गुरु मनुष्य को जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं और गुरु के मार्गदर्शन के बिना मनुष्य जीवन अधूरा रह जाता है।
भागवत कथा के समापन अवसर पर सभी भक्तजनों ने महंत स्वामी रामनारायण जी, संत राम सुमिरन जी एवं बाल संत पुनीत राम जी का अभिनंदन किया। संत राम सुमिरन जी ने कथा आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि श्री रामद्वारा में चातुर्मास सत्संग दशहरा तक जारी रहेगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन किए जाएंगे।




