Dhanteras 2026: धनतेरस पर सबसे पहले करें ये काम, शाम को 13 दीपक जलाने से लेकर पूजा तक जानें पूरी विधि
जानिए चांदी खरीदने से लेकर धनिया, झाड़ू, दीपदान और भोजन बनाने तक की पूरी जानकारी

धनतेरस पर घर में क्या करें और शाम को किस तरह करें पूजा?
News desk. आज शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। दीपावली की शुरुआत माने जाने वाले इस पर्व पर घरों में सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि धनतेरस की पूजा और परंपराएं सही तरीके से पूरी हों तो सुबह घर की सफाई से लेकर शाम के दीपदान तक कुछ खास काम कर सकते हैं।
धनतेरस पर सिर्फ सोना-चांदी खरीदना ही जरूरी नहीं है। इस दिन घर में पूजा की तैयारी करना, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी का पूजन करना, नई झाड़ू और धनिया खरीदना तथा शाम को यम दीपदान करना भी महत्वपूर्ण है।
लेकिन दिन की शुरुआत किस काम से करें? पूजा में क्या रखें? कितने दीपक जलाएं? नई झाड़ू और धनिया का बाद में क्या करें? आइए जानते हैं धनतेरस के दिन सुबह से रात तक किए जाने वाले जरूरी काम।
सुबह उठकर सबसे पहले करें ये काम
धनतेरस के दिन सुबह घर की अच्छी तरह सफाई करें। विशेष रूप से मुख्य दरवाजे, रसोई और पूजा घर को साफ करें। घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और दरवाजे पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगा सकते हैं। मुख्य दरवाजे के पास हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक और शुभ-लाभ के चिह्न बनाएं। धार्मिक मान्यता है कि साफ-सुथरे और सजे हुए घर में माता लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।
धनतेरस पर खरीदें ये शुभ वस्तुएं, चांदी का सिक्का खरीदना श्रेष्ठ
धनतेरस पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोना, चांदी, पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन खरीद सकते हैं। चांदी का सिक्का खरीदना भी इस दिन की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। चांदी के सिक्के पर माता लक्ष्मी या भगवान गणेश की आकृति हो तो उसे पूजा में शामिल किया जा सकता है। नई वस्तु खरीदने के बाद उसे साफ करके पूजा स्थल पर रखें। मान्यता है कि धनतेरस पर चांदी खरीदने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत आती है। बजट के अनुसार छोटी चांदी की वस्तु या कोई उपयोगी बर्तन खरीदना भी पर्याप्त है।
धनतेरस पर नई झाड़ू जरूर खरीदें, घर लाने के बाद करें यह काम
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। मान्यता है कि झाड़ू घर की दरिद्रता और नकारात्मकता को बाहर करने का प्रतीक है। इस दिन नई झाड़ू खरीदकर घर लाएं। उस पर हल्दी या कुमकुम का तिलक लगाएं और उसे साफ स्थान पर रखें। इसके बाद घर की सफाई में उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार धनतेरस पर झाड़ू खरीदना घर में बरकत और समृद्धि की कामना से जुड़ा है।
साबुत धनिया खरीदकर माता लक्ष्मी को करें अर्पित, बाद में इसका क्या करें?
धनतेरस पर बाजार से साबुत धनिया खरीदकर लाएं। इसे एक छोटी कटोरी में रखकर माता लक्ष्मी की पूजा में अर्पित करें। धनिया को धन-धान्य और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद इसे संभालकर रख सकते हैं। दीपावली की लक्ष्मी पूजा के बाद परिवार की परंपरा के अनुसार इसे रसोई में इस्तेमाल करें या गमले में बो दें। कई स्थानों पर धनिया को खेत में छिड़कने की भी परंपरा है। मालवा-निमाड़ के कृषि प्रधान क्षेत्र में इसे अच्छी फसल और घर में अनाज की बरकत की कामना से भी जोड़ा जाता है।
शाम को ऐसे करें पूजा, भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी को चढ़ाएं ये सामग्री
धनतेरस की शाम घर के मंदिर में पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर का स्मरण करते हुए पूजन करें। पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीपक और जल रखें। भगवान धन्वंतरि को आरोग्य की कामना के साथ याद करें और माता लक्ष्मी से घर में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। धनतेरस पर खरीदे गए चांदी के सिक्के, नए बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं को भी पूजा में रख सकते हैं। पूजा के बाद आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।
घर के इन स्थानों पर रखें दीपक
धनतेरस की शाम घर में दीपक जलाने का विशेष महत्व है। कई परिवारों में 13 दीपक जलाने की परंपरा है। आप भी अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार 5, 11 या 13 दीपक जला सकते हैं। दीपक घर के मंदिर, मुख्य दरवाजे, तुलसी के पास और घर के अन्य प्रमुख स्थानों पर रखे जाते हैं। इनमें एक दीपक यमराज के नाम से घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यमराज के नाम से दीपदान करने पर परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना पूरी होती है।
घर के मंदिर में कौन सी बत्ती का दीपक जलाएं? घी या तेल, क्या है सही तरीका?
धनतेरस की पूजा में मंदिर के लिए शुद्ध घी का दीपक जलाना प्रचलित परंपरा है। इसके लिए साफ रुई की सूती बत्ती का इस्तेमाल करें। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के सामने घी का दीपक जलाकर आरती करें। वहीं यम दीपदान के लिए तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। इसमें तिल या सरसों का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है।
धनतेरस के दीपक में क्या डालें? लौंग डालना जरूरी है या नहीं?
धनतेरस पर दीपक जलाने के लिए उसमें शुद्ध घी या तेल डालें और सूती बत्ती रखें। घर के मंदिर में घी का दीपक और यम दीपदान के लिए तेल का दीपक जला सकते हैं। कुछ परिवारों में दीपक में लौंग डालने की परंपरा भी है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। सामान्य घी या तेल का दीपक भी पूजा के लिए पर्याप्त है।
धनतेरस के दिन घर में क्या बनाएं?
धनतेरस पर घर में सात्विक भोजन बनाएं। इस दिन खीर, हलवा, पूड़ी और पारंपरिक मिठाइयां बनाई जा सकती हैं। पूजा में भगवान को फल, मिठाई और घर में बने पकवानों का भोग लगाएं। विशेष रूप से खीर का भोग कई परिवारों में शुभ माना जाता है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बांटें। घर में मिल-बांटकर भोजन करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जा सकती है।
धनतेरस के दिन कौन सी वस्तुएं घर में नहीं लानी चाहिए?
धनतेरस पर खरीदारी करते समय कुछ पारंपरिक मान्यताओं का ध्यान रखा जाता है। कई परिवार इस दिन टूटे-फूटे बर्तन, खराब सामान और अनुपयोगी वस्तुएं खरीदने से बचते हैं। कुछ मान्यताओं में काले रंग की वस्तुओं और कांच के सामान को भी इस दिन खरीदने से परहेज किया जाता है। नई खरीदारी में खाली बर्तन लाने के बजाय उसमें चावल या कोई शुभ सामग्री रखकर घर लाने की परंपरा भी है। ये अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित मान्यताएं हैं, कोई अनिवार्य धार्मिक निषेध नहीं।
धनतेरस पर आज के लिए याद रखें ये जरूरी काम
▪️सुबह घर की सफाई और मुख्य दरवाजे की सजावट करें।
▪️अपनी क्षमता के अनुसार चांदी, बर्तन या अन्य शुभ वस्तु खरीदें।
▪️नई झाड़ू खरीदकर घर में रखें।
▪️साबुत धनिया खरीदकर माता लक्ष्मी को अर्पित करें।
▪️शाम को भगवान धन्वंतरि, गणेशजी, माता लक्ष्मी और कुबेर का पूजन करें।
▪️पूजा में चांदी के सिक्के और नई खरीदी गई वस्तुएं रखें।
▪️घर में परंपरा के अनुसार 13 दीपक जलाएं।
▪️यमराज के नाम से घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपदान करें।
▪️घर में खीर या हलवा बनाकर भोग लगाएं।
धनतेरस पर एक बात जरूर याद रखें: धनतेरस की सभी परंपराओं का मूल भाव घर में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करना है। खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही करें। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखें। पूजा की विधि, दीपकों की संख्या और कुछ मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।




