खेत-खलियान

सोयाबीन की कटाई शुरू, किसानों में अगली फसल के लिए पानी की चिंता

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– 50 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई पूरी, कम बारिश से रबी फसल की सिंचाई को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता

टोंकखुर्द (विजेंद्रसिंह ठाकुर)। टोंकखुर्द अंचल में सोयाबीन की फसल अब खेतों से सिमटने लगी है, लेकिन कटाई के साथ ही किसानों के सामने अगली फसल की सिंचाई का सवाल खड़ा हो गया है। बरदु गांव में गुरुवार से सोयाबीन की कटाई शुरू हुई, जहां ग्रामीणों के अनुसार अब तक करीब 50 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई का काम पूरा हो चुका है।

किसानों का कहना है कि इस बार बारिश ने सोयाबीन की फसल को किसी तरह पकने लायक पानी तो उपलब्ध कराया, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी और जलस्रोतों में पानी का संचय नहीं हो सका। ऐसे में रबी सीजन की फसल के लिए किसानों को अभी से पानी की चिंता सताने लगी है।

ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में बारिश का औसत अपेक्षाकृत कम रहने से इसका असर खेती पर लगातार दिखाई दे रहा है। इस वर्ष भी बारिश का दौर ऐसा नहीं रहा कि खेतों और जलस्रोतों में पर्याप्त पानी जमा हो सके। सोयाबीन की फसल को उसकी आवश्यकता के अनुरूप पानी मिलने से फसल तो तैयार हो गई, लेकिन अगली फसल के लिए सिंचाई की स्थिति को लेकर किसान आशंकित हैं।

बरदु के किसान भंवरसिंह ठाकुर ने बताया कि सोयाबीन की कटाई के बाद किसान अगली फसल की तैयारी में जुटेंगे, लेकिन पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हुआ तो किसान अपनी पूरी जमीन में रबी की फसल नहीं ले पाएंगे। पानी की कमी के कारण इस बार भी खेत का एक हिस्सा बिना सिंचाई के रह जाने की आशंका है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई किसानों के पास उपजाऊ जमीन होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं होने से वे उसका पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। बारिश पर निर्भर खेती में लगातार कमी आने से किसानों की परेशानी बढ़ी है। किसानों को अब उम्मीद है कि आने वाले समय में बारिश या अन्य जलस्रोतों के माध्यम से पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके, जिससे रबी की फसल की बुआई और सिंचाई संभव हो सके।

इधर, टोंकखुर्द अंचल के कई अन्य गांवों में भी सोयाबीन की फसल अभी खेतों में खड़ी है। किसानों के अनुसार मौसम अनुकूल रहा तो आगामी करीब 10 दिनों में इन गांवों में भी सोयाबीन की कटाई का काम तेज हो जाएगा। फिलहाल किसान एक ओर तैयार फसल को सुरक्षित घर पहुंचाने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर अगली फसल के लिए खेत और पानी की व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों ने क्षेत्र में पर्याप्त बारिश और जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता के लिए भगवान से प्रार्थना की है। किसानों का कहना है कि सोयाबीन की फसल भले ही खेत से निकल रही हो, लेकिन उनके लिए खेती का अगला दौर पानी की उपलब्धता पर ही निर्भर करेगा।

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