देवास मंडी में हम्माल-तुलावटियों की दरों पर गहमागहमी, आखिर 6% बढ़ोतरी पर बनी सहमति

– 8 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग पर अड़े थे प्रतिनिधि, किसानों ने कहा- पहले ही ज्यादा हैं दरें, अब हर साल जुलाई में स्वत: बढ़ेगी पारिश्रमिक दर
देवास। कृषि उपज मंडी में बुधवार को हम्माल-तुलावटियों की पारिश्रमिक दरों के निर्धारण को लेकर आयोजित बैठक नोकझोंक व बहस के बीच चर्चा का केंद्र बनी रही।
करीब तीन घंटे चली बैठक में हम्माल प्रतिनिधियों ने 15 प्रतिशत दर वृद्धि की मांग रखी, जबकि किसान प्रतिनिधियों ने मंडी में पहले से ही अधिक दरें होने का हवाला देते हुए इसका विरोध किया। इस दौरान अनाज की गुणवत्ता, नीलामी प्रक्रिया और व्यापारियों के व्यवहार को लेकर किसान व व्यापारी प्रतिनिधियों के बीच चर्चा भी हुई।
आखिरकार गहमागहमी और पर्ची उछालने की प्रक्रिया के बाद 6 प्रतिशत दर वृद्धि पर सहमति बनी, जिसे 1 जून से लागू किया जाएगा। साथ ही यह भी तय हुआ कि अब हर वर्ष जुलाई माह में स्वत: पांच प्रतिशत दर वृद्धि की जाएगी।
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संयुक्त कृषक संगठन के प्रदेश महामंत्री जगदीश नागर ने कहा कि पहले भी एक साथ 15 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जिससे किसानों को परेशानी आई थी। मनमाने तरीके से बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। इस बीच किसानों के अनाज की गुणवत्ता के मामले में व्यापारी प्रतिनिधि व किसानों के प्रतिनिधियों में गर्मागरम बहस हो गई। किसान प्रतिनिधि दिनेश चौधरी का कहना था कि एक बार अनाज नीलामी में खरीद लिया जाए तो उसे मिट्टी वाला बताकर खरीदी से इंकार नहीं किया जा सकता।

इस दौरान जगदीश नागर ने सख्त नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि व्यापारी किसान को सन्देह की नजर से क्यों देखता है। जब नीलामी में माल खरीदते हैं तो देखकर खरीदना चाहिए। अगर उसे निरस्त करना है तो मंडी समिति के माध्यम से करना होता है, लेकिन यहां व्यापारी खुद बाेल देते हैं कि अनाज में मिट्टी है और नहीं खरीदते हैं। गहमागहमी को देखते हुए सचिव अरविंद परिहार ने हस्तक्षेप किया। इधर किसान प्रतिनिधि त्रिलोक पटेल ने कहा कि हम्माल-तुलावटी की दरें लगातार बढ़ रही है, इसका कोई पैमाना जरूर होना चाहिए।
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पर्ची उछाल कर लिया फैसला-
मंडी सचिव ने कहा कि अगले साल भी दर वृद्धि करना है तो इसे पांच प्रतिशत बढ़ा सकते हैं। इसके लिए पर्ची उछाली गई, जिसमें 5 प्रतिशत दर वृद्धि की पर्ची निकली। लेकिन हम्माल-तुलावटियों के प्रतिनिधियों की मांग पर इसे छह प्रतिशत बढ़ाने का फैसला लिया गया। पर्ची उछालकर यह भी तय किया गया कि अब हर साल जुलाई माह में स्वत: ही पांच प्रतिशत दर बढ़ेगी।
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इधर केदारेश्वर हम्माल संघ के कोषाध्यक्ष व अध्यक्ष प्रतिनिधि घनश्याम धनगर ने कहा कि हम इस सामान्य दर वृद्धि से संतुष्ट नहीं है। हर दो साल में दरें 15 प्रतिशत बढ़ती थीं। अभी हमने सहमति नहीं दी है, हम अपने सदस्यों से बात कर रहे हैं उसके बाद आगे की रूपरेखा बनाएंगे। हम बड़े तौल कांटे का भी विरोध करेंगे, अगर बड़े कांटे लगेंगे तो बड़ी संख्या में हम्माल बेरोजगार हो जाएंगे।
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मंडी की अव्यवस्था पर ध्यान दिलाया-
भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री शेखर पटेल ने बैठक में मंडी में किसानों को हो रही परेशानी की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि मंडी में ठंडे पानी के लिए मशीन खराब है। अनाज की बोली के दौरान एक ही व्यापारी कई फर्मों के लिए बोली लगाता है, जिससे किसानों का नुकसान हो रहा है। बड़े तौल कांटे पर अनाज तौलने पर भी हम्माली काटी जा रही है, इस पर रोक लगाना चाहिए।
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सभी की सहमति से लिया फैसला-
मंडी सचिव अरविंद परिहार का कहना है कि हम्माल तुलावटियों की वार्षिक दरें मंडी समिति द्वारा तय की जाती है। हमने अन्य मंडियों की दरों का भी अध्ययन किया है। किसानों पर भी अधिक बोझ ना हो और हम्माल-तुलाविटयों काे भी उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके, इसके लिए सभी ने विचार-विमर्श कर प्रतिवर्ष जुलाई माह में स्वत: ही वृद्धि का फैसला लिया है। इस वर्ष 6 प्रतिशत वृद्धि 1 जून से लागू की जाएगी। बैठक में भारतीय किसान संघ के संभागीय मंत्री बहादुर सिंह, अजमल चौधरी, मंडी अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष संजय पोरवाल, अर्पित अग्रवाल सहित अन्य उपस्थित थे।




