खेत-खलियान

नरवाई जलाने की जगह खेतों में करें गहरी जुताई, बढ़ेगी पैदावार और मिट्टी की ताकत- राजपूत

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देवास। गेहूं कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई अब बोझ नहीं, बल्कि किसानों के लिए “उत्तम खाद” साबित हो सकती है।

मप्र जन अभियान परिषद ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने की परंपरा छोड़कर इसे जैविक खाद में बदलने की तकनीक अपनाएं।

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राजपूत ने कहा, कि गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई को अक्सर किसान जला देते हैं, लेकिन यही नरवाई अगर सही तरीके से उपयोग की जाए तो खेत के लिए “सोना” साबित हो सकती है। उन्होंने कहा, कि नरवाई से बेहतरीन जैविक खाद तैयार की जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं।

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उन्होंने बताया कि नरवाई को रोटावेटर से बा रीक करके मिट्टी में मिला देना चाहिए। इससे यह प्राकृतिक खाद में बदल जाती है और जमीन की गुणवत्ता में सुधार होता है। खेतों में गहरी जुताई करने से नरवाई खाद बन जाती है। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से जहां एक ओर पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, वहीं दूसरी ओर खेत की जैव विविधता और उपयोगी सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं।

राजपूत ने किसानों से अपील की कि वे इस पारंपरिक लेकिन हानिकारक तरीके को छोड़कर आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाएं। इससे न सिर्फ अगली फसल का उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि खेत की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

 

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