राज्य

मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करते ही खाली हो सकता है बैंक खाता!

Share

 

  • नर्मदापुरम पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले दो अंतर्राज्यीय आरोपियों को झारखंड से किया गिरफ्तार
  • चार दिन तक भेष बदलकर निगरानी करती रही पुलिस, फिर दी दबिश
  • साइबर ठग APK फाइल एवं eSIM तकनीक के जरिए देते थे वारदात को अंजाम
  • पुलिस ने जारी किए जरूरी सुरक्षा सुझाव; अनजान लिंक और ऐप डाउनलोड करने से बचने की अपील

भोपाल। अगर आपके मोबाइल पर कोई अनजान APK फाइल, लिंक या ऐप डाउनलोड करने का मैसेज आए तो सावधान हो जाइए। एक छोटी सी गलती आपके बैंक खाते को खाली कर सकती है। नर्मदापुरम पुलिस ने झारखंड से ऐसे अंतर्राज्यीय साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जो APK फाइल और eSIM तकनीक के जरिए लोगों के मोबाइल का एक्सेस लेकर बैंक खातों से लाखों रुपए उड़ा रहे थे। इस मामले के बाद पुलिस ने नागरिकों के लिए विशेष साइबर सुरक्षा एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने की अपील की है।

प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में नर्मदापुरम जिले की थाना बनखेड़ी पुलिस एवं साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी की वारदात में शामिल दो अंतर्राज्यीय आरोपियों को झारखंड राज्य के देवघर जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपियों द्वारा फरियादी के बैंक खाते से 3 लाख 9 हजार 917 रुपए की ऑनलाइन ठगी की गई थी।

प्राप्त जानकारी अनुसार फरियादी छोटेलाल कुशवाह, उम्र 45 वर्ष, निवासी ग्राम डूमर थाना बनखेड़ी जिला नर्मदापुरम ने 17 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बैंक खाते से अज्ञात साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन माध्यम से कुल 3 लाख 9 हजार 917 रुपए की धोखाधड़ी की है। शिकायत पर थाना बनखेड़ी में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।

पुलिस अधीक्षक नर्मदापुरम साई कृष्णा एस. थोटा (IPS)के मार्गदर्शन में विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों एवं साइबर विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम 2 मई को झारखंड रवाना हुई। पुलिस टीम ने अत्यंत सूझबूझ एवं गोपनीय तरीके से आरोपियों के निवास क्षेत्र में लगातार चार दिनों तक भेष बदलकर निगरानी की। इसके पश्चात 7 मई को देर रात्रि दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में उमेश पिता शंकर दास उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम बिल्ली, मधुपुर जिला देवघर (झारखंड) तथा उत्तम कुमार पिता मनोज कुमार दास उम्र 23 वर्ष निवासी ग्राम गुनियासोल, मधुपुर जिला देवघर (झारखंड) शामिल हैं। आरोपियों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन, बैंक पासबुक एवं एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं।

ऐसे देते थे साइबर ठगी को अंजाम-

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी नागरिकों के मोबाइल पर APK फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड एवं इंस्टॉल करता था, आरोपी उसके मोबाइल की जानकारी प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद आरोपी पीड़ित के मोबाइल नंबर की eSIM तैयार कर लेते थे, जिससे बैंक खाते से जुड़े OTP एवं बैंकिंग अलर्ट सीधे आरोपियों तक पहुंचने लगते थे। इसी तकनीक का उपयोग कर फरियादी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में 3 लाख 9 हजार 917 रुपए ट्रांसफर किए गए।

क्या होती है APK फाइल?

APK (Android Package Kit) एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम में उपयोग होने वाली एप्लीकेशन फाइल होती है। जिस प्रकार कम्प्यूटर में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए “.EXE” फाइल का उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार एंड्रॉयड मोबाइल में एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए “.APK” फाइल का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः APK फाइल वैध मोबाइल एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए उपयोग होती है, लेकिन साइबर अपराधी इन्हीं APK फाइलों का दुरुपयोग कर फर्जी एवं हानिकारक एप्लीकेशन तैयार कर लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल कराते हैं।

साइबर अपराधियों द्वारा व्हाट्सएप, सोशल मीडिया लिंक, टेलीग्राम चैनल एवं अन्य ऑनलाइन माध्यमों से APK फाइल भेजी जाती है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड एवं इंस्टॉल करता है तथा मांगी गई परमिशन को अनुमति देता है, वैसे ही मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी अपराधियों की पहुंच में आ जाती है। इसके माध्यम से आरोपी मोबाइल के SMS, OTP,  बैंकिंग मैसेज, कॉन्टैक्ट, गैलरी एवं अन्य निजी जानकारी तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं और बाद में बैंक खातों से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन एवं साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं।

नागरिकों के लिए सावधानी एवं सुरक्षा संबंधी सुझाव

मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात लिंक, APK फाइल या मोबाइल एप्लिकेशन को डाउनलोड एवं इंस्टॉल न करें। केवल अधिकृत एप स्टोर से ही एप डाउनलोड करें। किसी भी व्यक्ति के कहने पर मोबाइल स्क्रीन शेयर न करें और न ही बैंकिंग संबंधी ओटीपी, पिन या पासवर्ड साझा करें।

यदि मोबाइल अचानक बंद हो जाए, नेटवर्क गायब हो जाए अथवा बिना जानकारी के eSIM एक्टिवेट होने का संदेश प्राप्त हो तो तुरंत अपने मोबाइल सेवा प्रदाता एवं बैंक से संपर्क करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा वेबसाइट National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं।

संबंधित खबरें-

Back to top button