साहित्य

पद की लालसा, भूतपूर्व होना भी अपने आप में अभूतपूर्व है

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वर्तमान में सभी क्षेत्र में पद के लिए जुगाड़ चल रहा है। आपके पास कोई पद होना अच्छी बात है। यदि आपके पास पद नहीं है, तो जुगाड़ करके थोड़े दिन के लिए कोई पद ले लीजिए, क्योंकि भूतपूर्व होना भी अच्छा माना जा रहा है। भूतपूर्व होने का भी फैशन चल रहा है। इसलिए राजनीतिक, सामाजिक सभी क्षेत्र में भूतपूर्व होने के लिए भी होड़ लगी हुई है।

पद की लालसा में वर्तमान परिदृश्य में हर कोई जुगाड़ में लगा हुआ है। हाईकमान तक जाने के लिए जोड़-तोड़ चल रही है। जब भी पूछो बस भैया अपना पद आ रहा है, बात हो गई है ऊपर तक। इसी प्रकार की मृगतृष्णा में तहसील, जिला, प्रदेश और देश तक के व्यक्ति अपने दावपेंच में लगे हुए हैं। सभी की एक ही लालसा है पद मिल जाए, भले ही कुछ दिन के लिए। बाद में अपनी गाड़ी पर भूतपूर्व लिखकर उसका महिमा मंडन कई वर्षों तक होता रहता है।

इसी पद के जुगाड़ में सुबह से शाम तक, सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर, व्यक्ति जुगाड़ में लगा रहता है। पद मिल जाए तो उसका जश्न इस तरह मनाया जाता है कि मानो पूरे देश का प्रभार मिल गया हो। लेकिन कुछ ही दिनों बाद जब पद चला जाता है तो उस पद को अपने आप में बनाए रखने के लिए भूतपूर्व लिखकर महिमा मंडन से बाज नहीं आते।

सभी जगह पद की होड चल रही है। कोई सा भी स्थान हो, सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक सभी जगह पद पाने की होड़ मची हुई है। भले ही थोड़ी देर के लिए पद मिल जाए। बाद में भूतपूर्व लिखकर काम चलता रहता है।
भूतपूर्व होना भी अपने आप में अभूतपूर्व हो जाता है। ऐसी है पद की महिमा।

Mahesh soni

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