देवास में पेयजल गुणवत्ता को लेकर महापौर का कड़ा रुख, बैठक में दी सख्त हिदायत

अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी, कहीं भी गंदा पानी मिला तो होगी सख्त कार्रवाई
देवास। शहरवासियों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने गुरुवार को नगर निगम के जलप्रदाय शाखा के अधिकारियों व कर्मचारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर पेयजल व्यवस्था की गहन समीक्षा की।
बैठक में महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी वार्ड में गंदे या मटमैले पानी की शिकायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
महापौर निवास पर आयोजित बैठक में महापौर श्रीमती अग्रवाल ने कहा कि हाल ही में इंदौर में जलप्रदाय को लेकर जो स्थिति बनी, उससे सबक लेते हुए देवास में पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने अधिकारियों से एक-एक बिंदु पर जानकारी ली और प्रत्येक वार्ड की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में शहर के सभी वार्डों के सुपरवाइजर उपस्थित रहे, जिनसे पेयजल आपूर्ति, पाइपलाइन की स्थिति और नागरिकों से प्राप्त शिकायतों की विस्तार से जानकारी ली गई।

चार वार्डों में मिली गंदे पानी की शिकायत-
बैठक के दौरान यह सामने आया कि शहर के चार वार्डों में कुछ स्थानों पर गंदे पानी की शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें से दो वार्डों में 10 से 12 घरों में दूषित पानी पहुंचने की पुष्टि हुई। इस पर महापौर ने संबंधित सुपरवाइजरों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि तुरंत पाइपलाइनों का बारीकी से निरीक्षण किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं लीकेज या सीवरेज का पानी पेयजल लाइन में तो नहीं मिल रहा।
कुछ क्षेत्रों में सीवरेज चेंबर ओवरफ्लो होने की जानकारी भी सामने आई, जिस पर महापौर ने नाराजगी जताते हुए सीवरेज विभाग को तत्काल सफाई और सुधार कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देवास के नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जहां भी समस्या है, उसका तुरंत और स्थायी समाधान किया जाए।
तीन दिन में सभी टंकियों की सफाई के निर्देश-
महापौर श्रीमती अग्रवाल ने शहर की पेयजल टंकियां के बारे में भी संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली अधिकारियों ने बताया कि शहर में कुल 19 पानी की टंकियां हैं, जिनकी आमतौर पर वर्ष में एक बार सफाई की जाती है। इनकी सफाई बारिश के बाद करवाई गई थी। महापौर श्रीमती अग्रवाल ने एहतियातन अब सभी टंकियों की सफाई तीन दिनों के भीतर कराने के निर्देश दिए। साथ ही सफाई कार्य की फोटो सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए।
अवैध नल कनेक्शन पर भी कड़ा रुख-
बैठक में महापौर ने अवैध नल कनेक्शनों को लेकर भी सख्त चेतावनी दी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे कनेक्शनों का सर्वे कर उन्हें वैध कराया जाए, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अवैध कनेक्शन न केवल जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता पर भी असर डालते हैं।
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण-
महापौर श्रीमती अग्रवाल ने अधिकारियों के साथ शिप्रा स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण भी किया। उन्होंने वहां पानी को शुद्ध करने की पूरी प्रक्रिया देखी और एलम, ब्लीचिंग पाउडर व फिटकरी के उपयोग की जांच की। साथ ही पानी के सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच भी करवाई। उन्होंने ट्रीटमेंट प्लांट के कर्मचारियों को भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर निर्देश दिए।
इस अवसर पर विधायक व महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल ने कहा, कि नगर निगम की पहली जिम्मेदारी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वयं मौके पर जाकर व्यवस्था की निगरानी करें
लापरवाही बर्दाश्त नहीं-
निरीक्षण में महापौर ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कहीं भी गंदे पानी की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। नगर निगम का उद्देश्य केवल जलापूर्ति नहीं, बल्कि हर नागरिक तक शुद्ध, सुरक्षित पानी पहुंचाना है।




