धर्म-अध्यात्म

माघ पूर्णिमा: स्नान, दान और आध्यात्मिक पुण्य का महापर्व

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– माघ पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहा जाता है। यह तिथि विशेष रूप से स्नान, दान, तप, जप और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में होते हैं, जिससे मन, बुद्धि और भावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

शास्त्रों में माघ मास को “देवताओं का प्रिय मास” कहा गया है। माघ पूर्णिमा इस मास की पूर्णता का प्रतीक है, इसलिए इस दिन किए गए धार्मिक कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

नदी की एक डुबकी, जन्मों का भार हल्का:
माघ पूर्णिमा के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती (त्रिवेणी संगम), नर्मदा, क्षिप्रा, गोदावरी, कावेरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार
– माघ पूर्णिमा पर स्नान करने से पापों का क्षय होता है।
– पूर्व जन्मों के संस्कारों का बोझ हल्का होता है।
– मनुष्य को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है।
– पूर्व जन्मों के कर्मों का प्रभाव क्षीण होता है।
– जो श्रद्धालु नदी तट तक नहीं पहुंच पाते, वे घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और ईश्वर का स्मरण कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

स्नान के बाद दान, तभी पूर्ण होता है पुण्य-
– शास्त्रों में कहा गया है स्नान के बिना दान अधूरा है और दान के बिना स्नान अपूर्ण है।
– माघ पूर्णिमा पर दान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। इस दिन किया गया दान अक्षय फल देने वाला माना जाता है।
– विशेष रूप से अन्न दान, वस्त्र दान, तिल, घी, कंबल दान।
– गरीब, असहाय और ब्राह्मणों को दान।
– ऐसा माना जाता है कि माघ पूर्णिमा पर दान करने से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

व्रत, जप और साधना-
माघ पूर्णिमा के दिन अनेक श्रद्धालु पूर्णिमा व्रत रखते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, नारायण, श्रीहरि या अपने इष्ट देव का पूजन करना विशेष फलदायी माना गया है।
“ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, सत्यनारायण कथा का पाठ करने या सुनने आदि धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

जब देवता भी उतरते हैं नदियों में-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास में देवता पृथ्वी पर आकर गंगा में स्नान करते हैं। इसलिए इस माह में किया गया स्नान देव स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है। माघ पूर्णिमा से कल्पवास का समापन भी होता है, विशेषकर प्रयागराज में, जहां लाखों श्रद्धालु एक माह तक नियमपूर्वक तप और साधना करते हैं।

माघ पूर्णिमा हमें पवित्रता, सेवा, संयम और करुणा का संदेश देती है। यह पर्व केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने आचरण, विचार और जीवनशैली को शुद्ध करने की प्रेरणा देता है।
माघ पूर्णिमा सनातन संस्कृति का एक दिव्य पर्व है, जो मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य अर्जन और आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है। इस पावन तिथि पर स्नान, दान, जप और सेवा के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

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