मकर संक्रांति और पतंगबाजी: परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

भारत में मकर संक्रांति का पर्व आते ही आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। छतों पर बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक की चहल-पहल और “काटा है”, “लपेट” जैसी आवाज़ें, ढोल-नगाड़ों की धुन- ये सब मिलकर इस पर्व को खास बना देते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि पतंग उड़ाने की यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई? क्या यह केवल भारत तक सीमित है या दुनिया के अन्य देशों में भी पतंग उड़ाई जाती है?
🔹 पतंग का प्राचीन इतिहास
पतंग का इतिहास हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, पतंग की उत्पत्ति चीन में लगभग 2500 वर्ष पहले हुई थी। प्रारंभ में पतंगों का उपयोग सैन्य संकेत, मौसम की जानकारी और संदेश भेजने के लिए किया जाता था। बाद में यह मनोरंजन का साधन बन गई।
चीन से होते हुए पतंग कला कोरिया, जापान, मलेशिया और भारत तक पहुंची। हर देश ने अपनी संस्कृति के अनुसार पतंगों को नया रूप दिया।
🔹 भारत में पतंगबाज़ी की परंपरा
भारत में पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। ऐतिहासिक ग्रंथों और लोककथाओं में इसके उल्लेख मिलते हैं। मुगल काल में पतंगबाज़ी शाही मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। कहा जाता है कि मुगल बादशाह और नवाब खास अवसरों पर रंग-बिरंगी और रेशमी पतंगें उड़ाया करते थे।
धीरे-धीरे यह परंपरा आम जनजीवन से जुड़ गई और त्योहारों का हिस्सा बन गई। विशेष रूप से मकर संक्रांति, उत्तरायण, बसंत पंचमी और बैसाखी जैसे पर्वों पर पतंग उड़ाने की परंपरा आज भी जीवित है।
🔹 मकर संक्रांति और पतंगों का संबंध
मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन से सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। पुराने समय में लोग छतों पर पतंग उड़ाते हुए धूप सेंकते थे, जिससे शरीर को विटामिन-डी मिलता था। इसी कारण मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना एक परंपरा बन गया, जो आज उत्सव का रूप ले चुकी है।
🔹 भारत के प्रमुख पतंग उत्सव
भारत के अलग-अलग हिस्सों में पतंगबाज़ी अलग अंदाज़ में की जाती है:
गुजरात (अहमदाबाद) – अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव
राजस्थान – मकर संक्रांति पर सामूहिक पतंगबाज़ी
उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार – पारंपरिक घरेलू पतंग उत्सव
तेलंगाना और कर्नाटक – रंग-बिरंगी सजावटी पतंगों की परंपरा
🔹 क्या अन्य देशों में भी उड़ाई जाती है पतंग?
हां, भारत के अलावा कई देशों में पतंग उड़ाना एक सांस्कृतिक परंपरा है-
चीन – पतंगों का जन्मस्थान, यहां विशाल और कलात्मक पतंगें उड़ाई जाती हैं।
जापान – नए साल पर पतंग उड़ाने की परंपरा है।
थाईलैंड और मलेशिया – अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव आयोजित होते हैं।
अफगानिस्तान – पतंगबाज़ी को पारंपरिक खेल माना जाता है।
🔹 आधुनिक समय में पतंगबाज़ी
हालांकि बदलते समय के साथ पतंगबाजी को लेकर सावधानी भी जरूरी हो गई है। सिंथेटिक मांझे के उपयोग से बचना चाहिए, ताकि पक्षियों और इंसानों को नुकसान न पहुंचे। आजकल पर्यावरण अनुकूल और सुरक्षित पतंगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पतंगबाज़ी केवल एक खेल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। मकर संक्रांति के अवसर पर आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें उत्साह, एकता और परंपरा का प्रतीक हैं। बदलते समय के साथ इसका स्वरूप भले ही बदला हो, लेकिन इसकी खुशबू आज भी हमारी संस्कृति में जीवित है।




