धर्म-अध्यात्म

नेमावर में नर्मदा तट पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर हजारों भक्तों ने किया पिंड तर्पण, दीपदान और हवन

नेमावर (संतोष शर्मा)। 16 दिवसीय श्राद्ध पक्ष की पूर्णाहुति पर सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर नर्मदा नाभि तीर्थ नेमावर आस्था और भक्ति से सराबोर हो उठा। शनिवार दोपहर की तेज बारिश भी भक्तों के उत्साह को रोक नहीं सकी। हजारों श्रद्धालु रातभर मां नर्मदा के पवित्र तट पर जुटे, पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना करते हुए जल तर्पण, दीपदान, हवन और पिंडदान में लीन रहे।

सनातन धर्म के अनुयायियों ने यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और पका भोजन दान कर पितरों को विदाई दी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया पिंडदान और तर्पण पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करता है। परशुराम की तपोभूमि कहे जाने वाले इस तीर्थ में वह पवित्र स्थल भी है, जहां भगवान परशुराम ने अपने माता-पिता के लिए पिंडदान किया था। मान्यता है कि उनके द्वारा किए गए पिंड आज भी नर्मदा-गोनी संगम स्थल पर पाषाण रूप में विद्यमान हैं। नर्मदा पर बैराज डेम का निर्माण जारी रहने से यह स्थान जलमग्न हो गया है, फिर भी श्रद्धालु इसे प्रत्यक्ष मानकर तर्पण के लिए यहां आते हैं। यह स्थान गया के समान मोक्षदायी माना जाता है।

दो दिवसीय मेला और भक्तों का उत्साह-

शुक्रवार रात से ही प्रदेशभर के साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से हजारों श्रद्धालु नेमावर पहुंचने लगे। शनिवार दोपहर भारी बारिश ने मेले और व्यापारियों का मनोबल कुछ समय के लिए गिराया, परंतु शाम होते-होते मेले की रौनक लौट आई। सिद्धनाथ, नागर और नवीन क्षीरसागर घाट पर रातभर भजन-कीर्तन, जागरण और दीपदान का क्रम चलता रहा। अकाल मृत्यु को प्राप्त पितरों की आत्मा की शांति के लिए हवन और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

प्रशासन की कड़ी तैयारियां-

हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। घाटों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, महिलाओं के लिए अस्थायी चेंजिंग रूम, स्नान स्थलों पर नावों में सुरक्षा गार्डों की तैनाती, बस पार्किंग की सुविधा और तत्काल सफाई जैसे उपाय किए गए। करीब 15 टीआई, 250 पुलिसकर्मियों, डीएसपी रैंक के अधिकारी, राजस्व, पीडब्ल्यूडी और विद्युत विभाग सहित कई महकमों के अधिकारियों ने व्यवस्था संभाली। नगर परिषद अध्यक्ष कृष्ण गोपाल अग्रवाल, सीएमओ आनंदीलाल वर्मा और थाना प्रभारी सुनीता कटारे ने सभी विभागों के सहयोग से मेले को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए सभी को धन्यवाद दिया।

प्रसादी भंडारा-

क्षेत्रीय विधायक आशीष शर्मा के सानिध्य में मां नर्मदा के तट पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। सेवा भावी भक्तों ने दो दिन पूर्व से भोजन तैयारियों की शुरुआत की। अमावस्या की सुबह मां नर्मदा को कड़ाई प्रसादी का भोग अर्पित कर भक्तों को भंडारे का प्रसाद वितरित किया गया, जो दोपहर तक अनवरत जारी रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य प्रसाद का लाभ उठाया।

चुनौतियों के बीच दिखा अडिग विश्वास-

मध्यप्रदेश शासन ने मां नर्मदा के पांच किलोमीटर क्षेत्र में शराबबंदी की घोषणा की थी, परंतु मेले में शराबियों का खुलेआम नशे में होना इस निर्णय की धज्जियां उड़ाता रहा। वहीं, नर्मदा के पुराने पुल का निर्माण कछुआ गति से होने के कारण कई श्रद्धालु इस बार दक्षिण तट के हंडिया घाट पर ही स्नान करने को मजबूर हुए। नर्मदा के उत्तर तट पर स्नान को अधिक पुण्यकारी माना जाता है, लेकिन ग्रामीण अंचल से हर अमावस्या पर पैदल आने वाले भक्तों को नए पुल से नेमावर सिद्धनाथ घाट तक पहुंचने के लिए पांच से छह किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ा।

श्रद्धा, परंपरा और भक्ति का यह विराट संगम नेमावर की पहचान को एक बार फिर जगमग कर गया। नर्मदा नाभि तीर्थ पर जल तर्पण, दीपदान और पिंडदान के साथ पितरों को विदाई देते हुए हजारों श्रद्धालुओं ने यह संदेश दिया कि समय चाहे बदल जाए, आस्था का दीप सदा उजाला फैलाता रहेगा।

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