खरपतवार नियंत्रण के लिए किसान अपना रहे देसी जुगाड़, मोटरसाइकिल से चला रहे डोरे

बेहरी। क्षेत्र में इस बार मौसम और मानसून अनुकूल रहने से किसानों की सोयाबीन फसल बेहतर विकास कर रही है। वर्तमान में फसल की उम्र 25 से 30 दिन के बीच है और इस समय खरपतवार नियंत्रण किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पारंपरिक रूप से बैल के माध्यम से डोरे चलाकर खरपतवार नष्ट किया जाता है, लेकिन इसमें समय और आर्थिक बोझ अधिक लग रहा है।
ऐसी स्थिति में किसानों ने परंपरागत तरीकों को छोड़कर जुगाड़ तकनीक अपनाना शुरू कर दिया है। बेहरी क्षेत्र में कुछ किसान मोटरसाइकिल से पतले टायर वाली ट्रॉली जोड़कर उसमें चार से अधिक डोरे लगाकर खेत में चला रहे हैं। इस तकनीक से वे एक दिन का काम महज कुछ घंटों में निपटा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह जुगाड़ एक लीटर पेट्रोल में लगभग एक हेक्टेयर खेत में उपयोगी साबित हो रहा है। हालांकि इस तकनीक में भी अतिरिक्त मजदूरों की आवश्यकता बनी रहती है।
जहां कुछ किसान आधुनिक जुगाड़ अपना रहे हैं, वहीं जिनके पास बैल जोड़ी है, वे अभी भी पारंपरिक विधि से ही खेतों में डोरे चला रहे हैं। किसानों का मानना है कि 5 से 10 दिनों के भीतर सोयाबीन की पंक्तियां आपस में मिल जाएंगी, जिससे डोरे चलाना मुश्किल हो जाएगा।
कृषि विस्तार अधिकारी काशीराम चौहान ने बताया कि यदि किसान समय पर खरपतवार नियंत्रण करें और फसल में ‘चारामार दवाओं’ का प्रयोग न करें, तो उत्पादन में 10% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मूंगफली और उड़द की फसलों में भी नींदाई-गुड़ाई करने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार में सुधार होता है।




