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किताबों की दुनिया में लौटे कदम

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– सांवरिया एकेडमी में शुरू हुई निःशुल्क लायब्रेरी
– मोबाइल युग में किताबों की अहमियत समझाने का प्रयास

देवास। जैसे-जैसे तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वैसे-वैसे पुस्तकों से लोगों की दूरी भी बढ़ती गई है। विशेषकर बच्चों और युवाओं के जीवन में मोबाइल और स्क्रीन समय इतना बढ़ गया है कि पुस्तकों का महत्व और शब्दों की गहराई मानो कहीं खो सी गई है। पढ़ाई हो या मनोरंजन सभी कुछ अब मोबाइल स्क्रीन तक सिमट गया है, लेकिन इस स्क्रीन टाइम का बच्चों की आंखों, दिमाग और एकाग्रता पर गहरा असर पड़ रहा है। इन्हीं चिंताओं को समझते हुए देवास के उज्जैन रोड स्थित सांवरिया एकेडमी में संचालक श्रवण जायसवाल ने एक प्रेरणादायी पहल की है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को फिर से पुस्तकों की ओर लौटाने के उद्देश्य से निःशुल्क लायब्रेरी की शुरुआत की है।

लायब्रेरी में 2 हजार से अधिक किताबें, हर रुचि के पाठकों के लिए कुछ न कुछ-
इस लायब्रेरी में पाठकों के लिए फिलहाल 2 हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। इनमें स्कूल व कॉलेज के कोर्स से जुड़ी किताबें, आध्यात्मिक ग्रंथ, ऐतिहासिक दस्तावेज, प्रेरक जीवनी, सफलता की कहानियां, मनोविज्ञान आधारित किताबें, उपन्यास, कविता संग्रह, करियर गाइडेंस, और सामान्य ज्ञान से जुड़ी किताबें शामिल हैं। पुस्तकें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं ताकि हर आयु वर्ग के पाठक इससे लाभान्वित हो सकें।

श्रवण जायसवाल बताते हैं आज के बच्चे व युवा दिन का बड़ा हिस्सा मोबाइल पर गेम खेलने, सोशल मीडिया पर समय बिताने और वीडियो देखने में गुजारते हैं। इससे उनकी एकाग्रता कम हो रही है और आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। बच्चों व युवाओं की कल्पनाशक्ति, भाषा पर पकड़ और सोचने की क्षमता किताबों से ही बेहतर बनती है। इसी सोच से हमने यह लायब्रेरी शुरू की है।

लायब्रेरी की विशेषताएं-

– निःशुल्क पठन की सुविधा है। कोई भी छात्र, शिक्षक, अभिभावक या नागरिक यहां आकर मुफ्त में किताबें पढ़ सकता है।

– घर ले जाने की सुविधा है। चयनित पुस्तकों को कुछ दिनों के लिए घर ले जाने की अनुमति भी दी जाती है।

– बुक एक्सचेंज सेवा है। यदि कोई पाठक अपनी पुरानी किताबों को यहां उपलब्ध कराना चाहे तो बदले में अन्य पुस्तकें ले सकता है।

– शांत व अध्ययनयोग्य वातावरण: पुस्तकालय में अध्ययन के लिए शांति, उपयुक्त कुर्सी-मेज और रोशनी का विशेष ध्यान रखा गया है।

क्यों जरूरी हैं किताबें-
श्रवण जायसवाल का मानना है किताबें केवल जानकारी का माध्यम नहीं होतीं, ये जीवन के अनुभव, सोच और संस्कारों की वाहक होती हैं। किताबों से भाषा का ज्ञान, कल्पना की शक्ति, धैर्य, सृजनशीलता और भावनात्मक समझ विकसित होती है। जहां मोबाइल पर कंटेंट कुछ ही सेकंड में बदल जाता है, वहीं किताबें मन को केंद्रित रखने की कला सिखाती हैं।

किताबों के नियमित अध्ययन से लाभ-

:तनाव कम होता है और मन में स्थिरता आती है।

:नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, जबकि मोबाइल पर देर रात तक समय बिताना नींद में बाधा डालता है।

:विज्ञान और इतिहास जैसी जटिल जानकारियों को गहराई से समझने में मदद मिलती है।

बच्चों और अभिभावकों से अपील-
श्रवण जायसवाल ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को मोबाइल की दुनिया से निकालकर किताबों की दुनिया से जोड़ें। हर दिन केवल 30 मिनट का पढ़ना भी बच्चे के भविष्य को बदल सकता है।

 

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