धर्म-अध्यात्म

पंचकोशी यात्रा में श्रद्धा और आस्था का हुआ अद्भुत संगम

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– गांव की खुशहाली, अच्छी वर्षा और समृद्धि के लिए निकाली धार्मिक यात्रा

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। खेड़ापति हनुमान मंदिर से इस वर्ष भी परंपरागत रूप से पंचकोशी यात्रा का शुभारंभ हुआ। ग्यारस के पावन अवसर पर गांव की सुख-शांति, अच्छी वर्षा और समृद्धि के लिए आयोजित इस धार्मिक यात्रा में महिलाओं ने उत्साह और आस्था के साथ भाग लिया। गांव की धरती देवी-देवताओं की जयकारों से गूंज उठी।

क्या है पंचकोशी यात्रा का महत्व? पंचकोशी यात्रा का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव के सामूहिक मंगल की भावना को दर्शाने वाला एक सांस्कृतिक पर्व है। मान्यता है कि इस यात्रा के दौरान देवी-देवताओं के विभिन्न स्थलों पर पूजा-अर्चना करने से क्षेत्र में इंद्र देव की कृपा बनी रहती है, रोग-दोष दूर होते हैं और समृद्धि का वास होता है। यह यात्रा सामाजिक एकता और सनातन परंपरा का एक जीवंत उदाहरण भी है।

हनुमान मंदिर से हुई यात्रा की शुरुआत- हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंचकोशी यात्रा का आरंभ गांव के प्राचीन खेड़ापति हनुमान मंदिर से किया गया। महिलाओं ने व्रत और पूजा के साथ यात्रा का संकल्प लिया और पूरे क्षेत्र के खेड़ा देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की।

पैदल यात्रा में दिखी आस्था की शक्ति- इस पवित्र यात्रा में गांव की महिलाएं उत्साहपूर्वक शामिल हुईं और कठिन राहों को भक्ति भाव से पार करते हुए पंचकोशी क्षेत्र की परिक्रमा की।

पंचकोशी यात्रा में वरिष्ठ कमलाबाई (पटलन), गीताबाई पटेल, सोरमबाई दांगी, मांगी बाई, रुकमा बाई, ममता बाई, सुगन बाई, मुन्नी बाई, लक्ष्मी बाई, जसोदा बाई, भगवंत बाई, अंगुरबाला, सपना बाई, गीता बाई, अनीता बाई, उषा बाई, राजू बाई सहित गांव के श्रद्धालु कुंवर पाटीदार, संतोष पाटीदार, गब्बूलाल पाटीदार, आत्माराम पाटीदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

पूरे गांव में भक्तिमय वातावरण- पूरे पंचकोशी क्षेत्र में देवी-देवताओं की पूजा, ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज के साथ वातावरण अत्यंत भक्तिमय बना रहा। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने विश्राम किया, भोग अर्पित किया और प्रसाद वितरित किया। जहां कहीं से यात्रा गुजरी, वहां गांववासियों ने श्रद्धा से स्वागत किया।

लिया संकल्प- यात्रा के समापन पर सामूहिक रूप से गांव की सुख-शांति, अच्छी फसल, वर्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई। महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे सनातन संस्कृति की यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी पूरी श्रद्धा से निभाएंगी।

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