धर्म-अध्यात्म

जिसका जैसा भाव, वैसे ही परमात्मा नज़र आते हैं – आचार्य पं. शुभम कृष्ण शास्त्री

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राम सियाराम, सियाराम जय-जय राम के उद्घोष से वातावरण हुआ राममय

देवास। खाटू श्याम महिला समिति, चाणक्यपुरी एक्सटेंशन, चंद्रेश्वर महादेव मंदिर, चाणक्यपुरी एक्सटेंशन में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रीराम-जानकी का विवाह धूमधाम से कथा पंडाल में मनाया गया। जैसे ही भगवान श्रीराम-जानकी को ढोल-धमाके के साथ कथा पंडाल में लाया गया, महिलाओं ने पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया।

व्यासपीठ से कथा वाचक आचार्य पं. शुभम कृष्ण शास्त्री (खातेगांव) ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि जब सीता स्वयंवर हुआ, तो संसार में कोई भी ऐसा सूरवीर नहीं था जो धनुष तोड़ सकता था। लक्ष्मण जी थोड़ी देर तक सुनते रहे, परंतु जब अधिक समय हो गया, तो उन्हें सहन नहीं हुआ। क्रोधित होकर लक्ष्मण जी ने राजन को सावधान किया।

विश्वामित्र जी ने भगवान से कहा। भगवान ने चरणों में प्रणाम किया और जैसे ही धनुष की ओर बढ़ने लगे, तब बड़े-बड़े महाराजाओं ने टिप्पणी करते हुए कहा – “अच्छा! यह धनुष तोड़ेगा?” लेकिन शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान हर व्यक्ति को उसकी भावना के अनुसार ही दर्शन देते हैं। माता को भगवान अपने पुत्र के रूप में नज़र आते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब भगवान धनुष के पास पहुँचे, तो उन्होंने पहले अयोध्या में बैठे अपने गुरुदेव वशिष्ठ को मन ही मन प्रणाम किया। फिर भगवान शिव का ध्यान कर धनुष को प्रणाम किया। इसके बाद जैसे कोई पुष्प उठा रहा हो, उसी सहजता से भगवान ने धनुष को उठाया। जैसे ही भगवान ने धनुष उठाया, गर्जना होने लगी, आकाश में बिजली चमकने लगी, और देवताओं ने पुष्पवर्षा शुरू कर दी। देवता भगवान की जय-जयकार करने लगे। भगवान धनुष को सीधा कर ही रहे थे कि धनुष टूट गया।

इस दौरान पं. शास्त्री जी ने भक्ति गीत “तोड़ दिया, तोड़ दिया, तोड़ दियो रे रघुनाथ ने धनुषवा” की सुमधुर प्रस्तुति दी, जिस पर श्रद्धालु झूमने लगे।

आयोजक खाटू श्याम महिला समिति, चाणक्यपुरी मंडल की विभा दुबे, देव बाई, पुष्पा वर्मा, ज्योति मिश्रा, मंजू धाकरे, हेमलता वर्मा, अनीता खराडिया ने व्यासपीठ की पूजा-अर्चना कर महाआरती की।

कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक हो रही है। सैकड़ों धर्मप्रेमियों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया।

 

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