“ऑपरेशन मैट्रिक्स” में बड़ी सफलता: 2 साल से फरार म्यूल अकाउंट गिरोह का सदस्य गिरफ्तार

देवास। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन मैट्रिक्स” के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने दो साल से फरार एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ा था।
देवास के औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने 26 अप्रैल को मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी गुलाब सिंह सायल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ग्राम कराडिया परी, तहसील सोनकच्छ का निवासी है और पिछले करीब 2 साल से पुलिस से बचता फिर रहा था। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया है और अब उससे पूछताछ जारी है, जिससे साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़ी और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
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क्या है पूरा मामला:
दरअसल, अगस्त 2024 में पुलिस ने म्यूल बैंक खातों से जुड़े एक बड़े गिरोह का खुलासा किया था। इस गिरोह के सदस्य गरीब और बेरोजगार लोगों के बैंक खाते किराए पर लेकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने में करते थे। उसी मामले में गुलाब सिंह फरार चल रहा था।
ऑपरेशन मैट्रिक्स क्या है:
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा शुरू किए गए “ऑपरेशन मैट्रिक्स” का उद्देश्य साइबर अपराधों पर रोक लगाना और ठगों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना है।
इस अभियान में ऐसे लोगों पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है जो अपने बैंक खाते दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए देते हैं या ऐसे खातों की व्यवस्था करते हैं। पुलिस का साफ कहना है कि ऐसे लोग भी साइबर ठगी में बराबर के आरोपी माने जाएंगे।
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साइबर ठग कैसे करते हैं काम:
आजकल साइबर अपराधी अपनी पहचान छुपाने के लिए गरीब और बेरोजगार युवाओं को लालच देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल करते हैं। इन खातों के जरिए ठगी की रकम इधर-उधर ट्रांसफर की जाती है, जिससे असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस टीम की भूमिका:
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के नेतृत्व में टीम ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही उपनिरीक्षक गौरव नगावत, आरक्षक अजय जाट और साइबर सेल के प्रधान आरक्षक सचिन चौहान का विशेष योगदान रहा।
पुलिस की अपील:
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते किसी भी व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। ऐसा करना आपको भी कानूनी मुसीबत में डाल सकता है।




