संत सिंगाजी महाराज के जन्मोत्सव पर भंडारा, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
निशान यात्रा, भजन-कीर्तन और तुलादान के साथ सिरोल्या मंदिर परिसर में 19वें वर्ष हुआ आयोजन

– सुबह 8 बजे गायत्री प्रज्ञापीठ गायत्रीनगर से शुरू हुई निशान यात्रा, श्रद्धालु क्षेत्र में भ्रमण कर सुबह 11:30 बजे मंदिर में पहुंचे
सिरोल्या (अमर चौधरी)। निमाड़ की धरा पर जन्मे तपस्वी संत कलियुग के भगवान कहे जाने वाले सिंगाजी महाराज के जन्मोत्सव पर देवास-बरोठा मुख्य मार्ग पर सिरोल्या में स्थित छप्पन महाराज संत सिंगाजी महाराज मंदिर पर भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की।
सुबह गायत्री प्रज्ञापीठ गायत्रीनगर से शुरू हुई निशान यात्रा ने पूरे गांव में भ्रमण किया। भजन मंडलियों का श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों में पूजन कर पूजा-अर्चना की एवं सिंगाजी महाराज के निशान की आरती उतारी। सुबह 11:30 बजे संत सिंगाजी मंदिर में यात्रा पहुंची। जहां समस्त भजन मंडलियों के सदस्यों ने परिक्रमा कर निशान चढ़ाए। सिंगाजी महाराज की आरती की गई।

उसके बाद महाप्रसादी वितरित की गई। भोजन प्रसादी का आयोजन शुरू हुआ जो दोपहर 3 बजे तक चलता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। मंदिर परिसर में तुलादान भी किया गया। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालुओं ने बाबा के प्रांगण में शीश झुकाया।

इससे पूर्व शुक्रवार को आसपास की भजन मंडलियों ने संत सिंगाजी की पावन धरा पर आकर भजन-कीर्तन किए। समिति के अनुसार कार्यक्रम का यह 19वां वर्ष है। इस अवसर पर कार्यक्रम में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए।
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श्रद्धा, सेवा और उत्साह का संगम-
भंडारे में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा। सुबह से ही लोग सेवा में जुट गए। किसी ने भोजन बनाने में सहयोग दिया तो किसी ने प्रसादी वितरण की जिम्मेदारी संभाली। महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी ने मिलकर सेवा भाव का परिचय दिया। भक्तों ने कतारबद्ध होकर श्रद्धा के साथ महाप्रसादी ग्रहण की। आयोजन में भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।




