लहसुन के भावों में अनिश्चितता से किसान परेशान, ‘सफेद सोना’ बना सिरदर्द!

बेहरी (हीरालाल गोस्वामी)। मेहनत और पसीने से खेतों में तैयार हुई लहसुन, जिसे ‘सफेद सोना’ कहा जाता है, आज किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। फसल के खेतों से बाहर का समय नजदीक है, लेकिन बाजार में लगातार गिरते दामों और बाजार की अनिश्चितता ने किसानों को असमंजस में डाल दिया है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कुछ मंडियों में लहसुन 40 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिका, लेकिन अब इसका भाव 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मंडियों में बिक रही है। ऐसे में किसान असमंजस में हैं कि वे अपनी मेहनत की इस फसल को कब और कैसे बेचें, जिससे उन्हें सही मुनाफा मिल सके।
भावों में गिरावट की चिंता- 15 से 20 दिनों में फसल होगी तैयार- बेहरी क्षेत्र के सैकड़ों किसान लहसुन की अच्छी फसल लेकर खड़े हैं, जो अगले 15-20 दिनों में खलिहानों तक पहुंच जाएगी। लेकिन, इस दौरान लहसुन के भाव स्थिर रहेंगे या गिरेंगे, यह अनिश्चितता किसानों को चिंतित कर रही है।
जल्दी पकाने के तरीके ढूंढ रहे किसान- कुछ किसान समय रहते बेहतर भाव प्राप्त करने के लिए लहसुन की फसल को जल्द पकाने के उपाय खोज रहे हैं।
कीमतों में गिरावट की आशंका- बेहरी क्षेत्र के किसान अजय पाटीदार और पवन पाटीदार का कहना है कि आसपास के दर्जनभर गांवों में इस बार लहसुन की बेहतरीन फसल तैयार हो रही है। लेकिन, किसानों को चिंता है कि मंडी तक पहुंचते-पहुंचते फसल के दाम गिर सकते हैं। किसानों का अनुमान है कि लहसुन की अधिक आपूर्ति होने पर कीमत 4000-5000 रुपए प्रति क्विंटल तक आ गई ।

व्यापारी अभी सौदे को लेकर निष्क्रिय- कुछ किसान अभी 5000 रुपए प्रति क्विंटल तक सौदा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन व्यापारी फिलहाल इस पर चर्चा तक नहीं कर रहे हैं।
इंदौर मंडी के व्यापारी पंकज यादव के अनुसार, लहसुन के भाव अब घटने की संभावना नहीं है इससे पहले दक्षिण भारत में लहसुन की मांग बढ़ने से कीमतें ऊंची हुई थीं, लेकिन अब इनके गिरने की संभावना है।
बेहरी के किसान रामचंद्र दांगी ने 2 हफ्ते पहले 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल पर लहसुन बेची थी, लेकिन 2 सप्ताह बाद वही क्वालिटी 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रही है। यह कीमतों में अस्थिरता ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।
मेहनत और लहसुन उत्पादन की चुनौतियां-
✔ जलवायु का प्रभाव लहसुन उत्पादन में पड़ता है। सर्दी के मौसम में ठंडी और सूखी जलवायु इस फसल के लिए अनुकूल होती है। लेकिन अचानक मौसम बदलने या बारिश होने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
✔ लहसुन उगाने में किसानों को लगातार देखरेख, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण जैसे अनेक कार्य करने पड़ते हैं। साथ ही बीज, खाद, कीटनाशकों और मजदूरी की लागत बढ़ने से किसानों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कम भाव मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पूर्व सरपंच रामचंद्र दांगी, डॉ. संतोष चौधरी, सेवानिवृत्त फौजी जय गोस्वामी आदि ने की मांग की, कि सरकार लहसुन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करे। बड़े व्यापारी और दलालों की जमाखोरी पर रोक लगे। मंडी में पारदर्शी नीलामी की जाए। फसल भंडारण की बेहतर सुविधाएं दी जाएं, ताकि किसान मजबूरी में कम दामों पर लहसुन न बेचें।




