धर्म-अध्यात्म

अगले जन्म में मैं कृष्ण बनूं और तू राधा

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– पं. जितेंद्र महाराज ने भागवत कथा में राधाकृष्ण के प्रेम का भावपूर्ण वर्णन किया

देवास। श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन मोती बंगला में अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु पंडित जितेंद्र महाराज दत्त अखाड़ा उज्जैन ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा की अनोखी प्रेम लीला का भावपूर्ण वर्णन किया।

उन्होंने कहा, जब भगवान श्रीकृष्ण के ब्रजमंडल को छोड़ने का समय आया, तो पूरे ब्रज में दुःख और पीड़ा की लहर दौड़ गई। माता यशोदा, नंद बाबा, ग्वाल-बाल, गोपियां और गोधन सभी विछोह के दुःख में डूब गए। लेकिन राधा ने कृष्ण से कहा, कन्हैया, मेरी आंखों में आंसू नहीं आएंगे। अगली बार जब जन्म मिले, तो मैं कृष्ण बनूं और तू राधा।

इस दौरान महाराज जी ने बताया, कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को सांत्वना दी और माता यशोदा से पहली बार झूठ बोलते हुए कहा, मैं परसों वापस आ जाऊंगा, लेकिन वर्षों बीत गए और कान्हा वापस नहीं आए। इस विछोह ने ब्रज की हर आत्मा को व्याकुल कर दिया।

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पंडित जितेंद्र महाराज ने कहा कि हानि-लाभ, जन्म-मृत्यु सब परमात्मा के हाथ में है। प्रेम, त्याग और भक्ति के भाव ही जीवन का आधार हैं। राधा-कृष्ण का प्रेम शाश्वत और आदर्श है, जो समर्पण और निस्वार्थता का प्रतीक है।

आओ सखी री, मुझे मेहंदी लगा दो की सुमधुर प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूम उठे-
पंडाल में भक्ति के रंग तब गहरे हो गए जब भजन, आओ सखी री, मुझे मेहंदी लगा दो, मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो की प्रस्तुति दी गई। श्रद्धालु झूम उठे और पूरा माहौल कृष्ण-भक्ति से सराबोर हो गया।

कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की धूमधाम-
पंडाल में कृष्ण और रुक्मिणी विवाह उत्सव भव्यता से हुआ। आयोजक मंडल के विनोदिनी रमेश व्यास, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज राजानी, सुधीर शर्मा, सिंधी समाज के अध्यक्ष अनिल पंजवानी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने व्यास पीठ का पूजन-अर्चन किया। महाआरती का संचालन भगवानसिंह चावड़ा ने किया।

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