देवास

कार के 50 लीटर के टैंक में आया 65 लीटर डीजल!

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उपभोक्ता की शिकायत पर पेट्रोल पंप पहुंची नापतौल और खाद्य विभाग की टीम, टैंक खाली करवाकर जांची क्षमता; मशीनों की सील भी मिली सत्यापित

देवास। भोपाल रोड स्थित कलेक्ट्रोरेट के समीप नर्मदा फिलिंग स्टेशन पर उस समय स्थिति दिलचस्प हो गई, जब 50 लीटर क्षमता बताए जा रहे क्रेटा कार के टैंक में जांच के दौरान 65 लीटर डीजल आ गया।

उपभोक्ता की शिकायत पर सोमवार को नापतौल एवं खाद्य विभाग की टीम पेट्रोल पंप पहुंची थी और मौके पर ही कार के टैंक की क्षमता तथा पेट्रोल पंप की मशीनों की जांच की। जांच में मशीनों में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली, जबकि कार के टैंक में 65 लीटर डीजल आ गया।

मामला देवास निवासी विजय कटेसरिया से जुड़ा है। उन्होंने 16 अगस्त को अपनी क्रेटा कार में नर्मदा फिलिंग स्टेशन से करीब 4200 रुपए का डीजल भरवाया था। डीजल की मात्रा को लेकर संतुष्ट नहीं होने पर उन्होंने पेट्रोल पंप संचालक से बात की। संचालक की ओर से बताया गया कि कार की टंकी की क्षमता 50 लीटर है और इसमें करीब आठ लीटर डीजल और आ सकता है।

इसके बाद उपभोक्ता ने आठ लीटर डीजल और भरवाया, लेकिन टैंक फुल नहीं हुआ। मामले को लेकर उन्होंने कलेक्टर कार्यालय में शिकायत की। सोमवार को नापतौल एवं खाद्य विभाग की टीम पेट्रोल पंप पहुंची।

पांच-पांच लीटर की कुप्पी से हुई टैंक की जांच-
जांच के दौरान उपभोक्ता विजय कटेसरिया भी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने पहले कार का टैंक पूरी तरह खाली करवाया। इसके बाद पांच-पांच लीटर की कुप्पी से टैंक में डीजल डालकर क्षमता की जांच शुरू की गई।

एक-एक कर डीजल डालते हुए कुल 13 बार में 65 लीटर डीजल कार के टैंक में आया। इसके बाद टीम ने पेट्रोल पंप की डीजल मशीनों की भी जांच की। नापतौल निरीक्षक श्यामसुंदर दुबे ने मशीनों पर लगी सभी सीलों को देखा। जांच में सील सत्यापित मिलीं और मशीनों में भी कोई कमी नहीं पाई गई।

नापतौल निरीक्षक बोले- टैंक की वास्तविक क्षमता जांचना जरूरी-
नापतौल निरीक्षक श्यामसुंदर दुबे ने बताया कि वाहनों के टैंक की क्षमता को लेकर कई बार वाहन निर्माता की बताई क्षमता और वास्तविक रूप से टैंक में आने वाली मात्रा में अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए शिकायत मिलने पर केवल अनुमान के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय कार का टैंक पूरी तरह खाली करवाकर दोबारा डीजल भरकर क्षमता की जांच की गई।

उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कार के टैंक में 65 लीटर डीजल आया। इसके साथ ही पेट्रोल पंप की मशीनों और उन पर लगी सीलों की भी जांच की गई, जो सत्यापित मिलीं। मशीनों में किसी प्रकार की कमी नहीं पाई गई।

खाद्य विभाग ने भी किया निरीक्षण-
मामले में सहायक आपूर्ति अधिकारी बीएस राय ने भी पेट्रोल पंप का निरीक्षण किया। विभागीय जांच के दौरान पेट्रोल पंप की मशीनों में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई। टैंक की क्षमता की दोबारा जांच किए जाने के बाद उपभोक्ता भी जांच के परिणाम से संतुष्ट हुआ।

जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि 50 लीटर क्षमता बताए जा रहे टैंक में 65 लीटर डीजल आया। इससे उपभोक्ता में संदेह की स्थिति बनी।

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