दया, धर्म, प्रेम व विश्वास पर रखी गई है सत्य सनातन की नींव- सद्गुरु मंगलनाम साहेब

देवास। सत्य, सनातन की जो नींव है, वह सत्य, दया, धर्म, प्रेम और विश्वास पर रखी गई है। संसार की नासमझी और जल्दबाजी में कई धर्म और गुण प्रकट हुए। मन की चालाकी से हम तत्काल किसी चीज का लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन हम उसका सिस्टेमेटिक ढंग बिगाड़ देते हैं। इसलिए हमको दया धर्म की राह दिखाई गई है। दया और धर्म के रास्ते ही चलना है। किसी को हमारी वाणी एवं विचारों से हमारे कर्मों से तकलीफ ना हो। उसको बहुत दूसरे तरीके से करके संतोष, सत्य दया, प्रेम और विश्वास को कायम करना है। यह विचार सद्गुरु मंगलनाम साहेब ने सद्गुरु कबीर सर्वहारा प्रार्थना स्थली मंगल मार्ग टेकरी पर आयोजित चौका विधान, चौका आरती, गुरुवाणी पाठ में व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि सद्गुरु कबीर का जीवन बताता है कि परमात्मा पास से भी पास है और सहजता से भी सहज है।बाहरी सुख सुविधाओं की मृग-मरीचिका में जटिल और असहज हो चुका मनुष्य उस परम की गहरी छांव से दिनोदिन दूर होता चला जा रहा है। इस सांसारिक जगत में विरले लोग हैं, जो उसकी याद से भर जाते हैं। प्रतिदिन यह जो उदय और अस्त होता है। वास्तव में अंधेरा होता नहीं है। अंधेरा उजाले की पहचान है। यदि अंधेरा नहीं होगा तो उजाले को पहचानोगे कैसे। रंग से ही संसार का जन्म हुआ है। विश्व में शांति व मानवता कायम करने का ही हमारा उद्देश्य है। भजन सत्संग, गुरुवाणी पाठ के बाद महाप्रसादी वितरित की गई।




