जब-जब देश पर संकट आया, संघ के स्वयंसेवकों ने सेवा और सुरक्षा का दायित्व निभाया- राजमोहन सिंह

देवास में संघ के शताब्दी वर्ष पर प्रमुख युवा जन गोष्ठी का आयोजन
देवास। संघ के शताब्दी वर्ष में देशभर में प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन हो रहा है। इसी क्रम में युवाओं हेतु “प्रमुख युवा जन गोष्ठी” का आयोजन देवास में सेंट्रल इंडिया एकेडमी में संपन्न हुआ।
इस गोष्ठी में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मालवा प्रांत के प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह के साथ देवास विभाग संघचालक अजय गुप्ता एवं देवास नगर संघचालक राजेश अग्रवाल मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन कर किया।
युवाजन गोष्ठी के मुख्यवक्ता राजमोहन सिंह ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए संघ की 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1925 में नागपुर के मोहिते के बाड़े में लगी एक छोटी सी शाखा से प्रारंभ हुआ यह संगठन आज विश्व का एक विराट एवं सशक्त संगठन बन चुका है। उन्होंने कहा कि उस समय समाज में अपने आप को ‘हिंदू’ कहने में लोग संकोच करते थे, किन्तु संघ ने हिंदू होने को गौरव का विषय बनाकर समाज में आत्मविश्वास जागृत किया।

स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश विभाजन (1947) तक संघ की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि विभाजन के समय संघ के स्वयंसेवकों ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना हजारों हिंदू परिवारों को सुरक्षित भारत लाकर बसाने का कार्य किया। इसी प्रकार 1962 के भारत-चीन युद्ध तथा 1971 के भारत-पाक युद्ध सहित जब-जब देश पर संकट आया, संघ के स्वयंसेवकों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवा और सुरक्षा का दायित्व निभाया।
उन्होंने बताया कि आज संघ के प्रेरणा से विविध संगठन समाज के अलग-अलग क्षेत्रों शिक्षा, सेवा, श्रम, किसान, महिला सशक्तिकरण आदि में कार्य कर रहे हैं, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
कार्यक्रम के समापन में उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में “पंच परिवर्तन” के संकल्प का आह्वान किया। इसमें नागरिक शिष्टाचार, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता तथा ‘स्व’ के बोध जैसे विषयों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी। आपने बताया कि देश को परम वैभव तक ले जाने के लिए राष्ट्रीय चरित्र वाले युवाओं की आवश्यकता है।
जिज्ञासा-समाधान सत्र में युवा प्रतिभागियों ने राजमोहन सिंह से संघ की कार्यप्रणाली, गतिविधियों सहित समरसता, सद्भाव, पर्यावरण जैसे विभिन्न विषयों पर संघ अपनी प्रश्न के रूप में जिज्ञासाए प्रकट की जिसका समाधान एवं उत्तर उन्होंने दिया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम गान के साथ हुआ।




