धर्म-अध्यात्म

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के अंतर्गत शिक्षक गरिमा शिविर गायत्री शक्तिपीठ पर संपन्न

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बच्चों के सर्वांगीण विकास में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका- अजय मिश्रा

देवास। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के अंतर्गत शिक्षक गरिमा शिविर गायत्री शक्तिपीठ साकेत नगर देवास पर संपन्न हुआ।

मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रदेश संयोजक श्रीकृष्ण शर्मा, सह समन्वयक उपझोन इन्दौर महेंद्र गुप्ता, जिला समन्वयक बीएल खंडेलवाल, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक शिवनारायण शर्मा एवं सहायक प्रबंधक ई गवर्नेश जिलाधीश कार्यालय के मनोज कुमार थे।

गायत्री शक्तिपीठ के मीडिया प्रभारी विक्रमसिंह चौधरी ने बताया कि अतिथियों द्वारा श्रीवेद माता गायत्री, पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्यजी एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा का पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथियों एवं उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं का मंगल तिलक लगाकर मोतियों की माला एवं गायत्री परिवार का उपवस्त्र (दुपट्टा) पहनाकर स्वागत किया गया। गायत्री शक्तिपीठ देवास के बाल संस्कार शाला की नन्ही बालिकाओं द्वारा गुरु वंदना व सरस्वती वंदना संगीतमय प्रस्तुत की गई।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए हरिद्वार से प्रशिक्षित शिक्षक एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के पूर्व जिला संयोजक पं. देवीशंकर तिवारी ने कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए उपस्थित सभी अतिथियों का परिचय कराते हुए उपस्थित सभी परिजनों का शब्दों की गहराई से स्वागत किया गया।

प्रशिक्षण शिविर के प्रारंभिक प्रथम सत्र में गायत्री परिवार के वरिष्ठ परिजन एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला सचिव अरविंद शर्मा ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के उद्देश्य एवं स्वरुप पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उपस्थित शिक्षकों व परिजनों को आगामी शिक्षा सत्र में जिले की बेहतर कार्य योजना बनाने हेतु चर्चा की एवं अपने अनुभव साझा किए। वरिष्ठ परिजन अरुण कुमार शैव्य ने शिक्षा ही नहीं विद्या भी विषय पर प्रकाश डाला।

युवा प्रकोष्ठ के जिला समन्वयक प्रमोद निहाले ने छात्रों में विचार क्रांति अभियान क्यों और कैसे पर विस्तार से प्रभावी चर्चा की स मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने परीक्षा के लिए विभाग की ओर से पूर्ण सहयोग की बात करते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। मैंने स्वयं ने भी विद्यार्थी जीवन में यह परीक्षा दी है, इसका सुखद अनुभव जीवन में है। मनोज कुमार ने कहा कि हम सुधरेंगे तो सब सुधर जाएंगे। इस तथ्य पर हमें विश्वास कर चलना होगा तभी संभव होगा।

जितेन्द्र त्रिवेदी ने गायत्री यज्ञ, सदविचार एवं सत्कर्म एवं लक्षित दुबे ने अध्यापक है युग निर्माता, महेंद्र गुप्ता ने अधिक से अधिक छात्रों को परीक्षा में बिठाने की बात कहते हुए अपने विचार रखे। परीक्षा के जिला संयोजक शिवनारायण शर्मा ने अगले वर्ष अधिक से अधिक छात्रों को परीक्षा में बिठाने का लक्ष्य का संकल्प लिया और सभी से सहयोग की अपेक्षा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीकृष्ण शर्मा ने संपूर्ण कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि उक्त परीक्षा के माध्यम से गुरुदेव की मंशा अनुसार बच्चों का सर्वांगीण विकास हो, उसमें हमारी भारतीय संस्कृति के साथ संस्कार एवं सभ्यता जीवन में मार्गदर्शन प्रदान करें तभी वह जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझ सकेगा एवं अपना जीवन को सफल बना सकेंगे।

इस अवसर पर कांतिलाल पटेल, रमेशचन्द्र मोदी, गणेश व्यास, राधेश्याम सोलंकी, रमेशचंद्र मेहता, सतीशचन्द्र तिवारी, सालिगराम सकलेचा, लक्ष्मीनारायण मोहरी, सुरेश बालपाण्डेय, दिलीपसिंह सोलंकी, हरिओम लोटन, गुलाबसिंह सोलंकी, सुरेंद्र दुबे, फूलसिंह नागर, वासुदेव जोशी, टीना सोलंकी एवं दयानन्द लुनिया सहित गायत्री परिजन उपस्थित थे। टोंकखुर्द तहसील समन्वयक हजारीलाल चौहान ने आभार व्यक्त किया।

 

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