देवास में महिला डॉक्टर पर केस दर्ज, अस्पताल को किया सील

मामला कन्या भ्रूण गर्भपात की कथित बातचीत के वायरल वीडियो का
देवास। शहर में एक वायरल वीडियो ने न केवल मानवता को झकझोर दिया, बल्कि व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कथित तौर पर एक महिला चिकित्सक रुपए लेकर कन्या भ्रूण गिराने के लिए तैयार होती नजर आ रही है। मामला सामने आते ही पुलिस ने संबंधित महिला डॉक्टर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित रूप से महिला चिकित्सक पैसा लेकर कन्या भ्रूण गिराने की बात कहती दिखाई दे रही हैं। बातचीत में महिला-पुरुष से वह अगले दिन सुबह आने की बात भी कहती सुनाई देती हैं।
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया।उनके निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल जांच शुरू की। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सरोजनी जेम्स बेक के नेतृत्व में गठित टीम ने मामले की पड़ताल की, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। जांच प्रतिवेदन के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने श्रीराम नर्सिंग होम की संचालिका डॉ. चारू तिवारी के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट की धारा 23(1), 25 और एमटीपी एक्ट की धारा 5(2) के तहत अपराध दर्ज किया है।

डॉक्टर ने लगाया ब्लैकमेल का आरोप-
इस पूरे घटनाक्रम के बीच महिला चिकित्सक ने कुछ लोगों पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हुए कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिस पर पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद जांच का रुख बदल गया और अब स्वयं चिकित्सक पर भी कार्रवाई की गई है। इधर गुरुवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी विनय व रजनी निवासी पटियाला को गिरफ्तार कर लिया है।
अस्पताल को किया सील-
स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अस्पताल के लाइसेंस को निरस्त किया है। शाम को तहसीलदार सपना शर्मा के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची। इसके बाद अस्पताल को सील कर दिया गया।
बड़े नेटवर्क की आशंका-
सूत्रों का दावा है कि देवास जिले में भ्रूण लिंग परीक्षण का अवैध नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है, लेकिन कार्रवाई सीमित स्तर पर ही हो पाती है। यही कारण है कि कुछ लोग लालच में आकर कानून और नैतिकता दोनों को ताक पर रख देते हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग-
वीडियो सामने आने के बाद शहर में लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह के अमानवीय कृत्यों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई-
इस मामले में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब सबकी नजर आगे की जांच और संभावित बड़े खुलासों पर टिकी हुई।




