e-Zero FIR: देवास पुलिस की बड़ी सफलता, 1500 किमी दूर झारखंड के संगठित गिरोह का पर्दाफाश, 4.01 लाख रु. जब्त

RTO Chalan.apk नाम की संदिग्ध लिंक भेजकर आरोपियों ने किया था मोबाइल हैक
APK फाइल के जरिए हुई साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की
देवास में APK फाइल के जरिए हुई साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। e-Zero FIR प्रणाली के तहत कार्रवाई करते हुए झारखंड के गिरिडीह जिले में सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
APK फाइल से हुआ साइबर फ्रॉड-
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रेसवार्ता में एसपी पुनीत गेहलोद ने देते हुए बताया 3 जनवरी 2026 को लक्ष्मी बाई मार्ग नाहर दरवाजा क्षेत्र निवासी महान मालवीय उम्र 28 वर्ष के साथ साइबर ठगी की घटना हुई। उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से “RTO Chalan.apk” नाम की संदिग्ध लिंक भेजी गई। जैसे ही उन्होंने लिंक डाउनलोड की, उनका मोबाइल हैक हो गया और आरोपियों ने उनके बैंक खाते से 4,75,000 रुपए निकाल लिए।
e-Zero FIR से तुरंत हुई कार्रवाई-
पीड़ित की शिकायत पर थाना नाहर दरवाजा में e-FIR धारा 318(4) बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज किया गया।
1500 किमी दूर झारखंड तक पहुंची पुलिस-
देवास पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। बैंक खातों को तुरंत फ्रीज कराया गया और लेनदेन की कड़ी जोड़ते हुए पुलिस टीम झारखंड के गिरिडीह जिले तक पहुंच गई।
4 आरोपी गिरफ्तार, लाखों की राशि जब्त-
पुलिस ने संगठित गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया।
– रोशन (पिता संतोष मोदी, उम्र 24 वर्ष) निवासी ग्राम मंगसो, थाना धनवार, जिला गिरिडीह (झारखंड)
– सुजीत कुमार (पिता राजू राम चंद्रवंशी) निवासी ग्राम मंगसो, थाना धनवार, जिला गिरिडीह (झारखंड)
– सुजीत पासवान (पिता रामचंद्र पासवान, उम्र 21 वर्ष) निवासी ग्राम श्रीरामडीह, थाना धनवार, जिला गिरिडीह (झारखंड)
– सुजीत चंद्रवंशी (पिता स्व. श्याम सुंदर चंद्रवंशी, उम्र 28 वर्ष) निवासी ग्राम बडरान, थाना तीसरी, जिला गिरिडीह (झारखंड)।
आरोपियों के कब्जे से ₹4,01,000 नकद और 4 एंड्रॉइड मोबाइल फोन (कीमत लगभग ₹80,000) जब्त किए गए।
“ऑपरेशन साइबर” बना बड़ा हथियार-
देवास पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन साइबर” के तहत लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इस अभियान में अब तक
– ₹2.50 करोड़ से अधिक राशि होल्ड कराई गई।
– ₹2.43 करोड़ से अधिक राशि पीड़ितों को वापस दिलाई गई।
– 2500 मोबाइल नंबर ब्लॉक किए गए।
– 2587 शिकायतों पर कार्रवाई की गई।
– 160 लोगों को डिजिटल अरेस्ट से बचाया गया।
मोबाइल नंबर ब्लॉक कर ठगों पर कड़ा प्रहार-
सायबर ठगी में उपयोग किए जा रहे मोबाइल नंबरों की पहचान कर उन्हें दूरसंचार विभाग के सहयोग से ब्लॉक कराया जा रहा है। इससे ठगों की गतिविधियों पर रोक लग रही है और वे नए लोगों को निशाना नहीं बना पा रहे हैं।
गांव-गांव में पुलिस कर रही जागरूक-
हर थाना स्तर पर “साइबर मित्र” नियुक्त किए गए हैं। पुलिस चौपाल के माध्यम से गांव, मोहल्लों और वार्डों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि—
किसी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड न करें, बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें, साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 या 112 पर कॉल करें।
एसपी पुनीत गेहलोद की अपील-
देवास पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने प्रेस वार्ता में कहा कि साइबर ठग अब APK फाइल और लिंक के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका-
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अमित सोलंकी, उप निरीक्षक जगदीश चौहान, प्रधान आरक्षक नितेश द्विवेदी, धर्मराज सिंह, यशवंत तोमर, आरक्षक नवदीप महाजन सहित साइबर सेल प्रभारी शिवप्रताप सिंह सेंगर और उनकी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जागरूकता ही बचाव-
यह मामला साफ करता है कि एक छोटी सी गलती (APK फाइल डाउनलोड करना) बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकती है। समय पर शिकायत और पुलिस की तत्परता से बड़ी राशि वापस मिल सकती है, लेकिन सबसे जरूरी है- सतर्कता और जागरूकता।




